क्या मदनी को दूसरे धर्मों में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है?
सारांश
Key Takeaways
- गंगोत्री धाम में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है।
- महंत स्वामी नारायण दास ने धार्मिक हस्तक्षेप के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।
- सुधार का निर्णय साधु-संतों के हाथ में होना चाहिए।
- धार्मिक स्थलों की पवित्रता की रक्षा जरूरी है।
- इस विषय को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए।
ऋषिकेश, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूरा प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस फैसले को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। श्री भरत मिलाप आश्रम के महंत स्वामी नारायण दास महाराज ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी के उस बयान पर कड़ा जवाब दिया है, जिसमें उन्होंने इस निर्णय को भेदभावपूर्ण और संविधानिक मूल्यों के खिलाफ कहा है।
महंत स्वामी नारायण दास ने धार्मिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि किसी को भी दूसरे के अधिकार क्षेत्र में दखल नहीं देना चाहिए। अरशद मदनी को यह समझना चाहिए कि मक्का-मदीना में गैर-मुसलमान नहीं जाते। वहां केवल उनके अनुयायी ही जाते हैं। इसलिए, किसी अन्य धर्म के मानबिंदुओं और आस्थाओं में हस्तक्षेप करने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है।
महंत स्वामी नारायण दास ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में स्पष्ट रूप से कहा कि यदि सनातन धर्म में सुधार या बदलाव की आवश्यकता होगी, तो उसका निर्णय स्वयं साधु-संत करेंगे। यदि अन्य धर्म के लोग सनातन धर्म के धार्मिक स्थलों में प्रवेश करेंगे, तो निश्चित रूप से विवाद होगा। धार्मिक स्थलों की पवित्रता और परंपरा की रक्षा करना आवश्यक है और इसमें किसी प्रकार की ढिलाई नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि गैर-हिंदुओं के मंदिरों में प्रवेश पर रोक केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे पूरे देश के सभी मंदिरों में लागू किया जाना चाहिए। महंत ने कहा कि कई बार यह देखा गया है कि जब कोई गैर-हिंदू सनातन धर्म के मंदिरों में प्रवेश करता है, तो वहाँ अव्यवस्था फैलती है और मंदिर परिसर की शांति भंग होती है। इसलिए, धार्मिक स्थलों की गरिमा बनाए रखने के लिए सख्त नियम जरूरी हैं।
महंत स्वामी नारायण दास महाराज ने वर्तमान विवाद और धरने पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। यह कोई राजनीतिक विषय नहीं, बल्कि धार्मिक सम्मान और आस्था से जुड़ा मामला है। जो लोग इसे राजनीति से जोड़ रहे हैं, उन्हें इससे दूर रहना चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और शंकराचार्य आपस में बैठकर इस विषय पर कोई निर्णय लेते हैं, तो राजनीति करने वालों को कोई मौका नहीं मिलेगा।
महंत ने कटाक्ष करते हुए कहा कि राजनीति वही लोग कर रहे हैं, जिन्होंने पहले महाराज पर लाठी चलवाई थी और अब वही उनके शुभचिंतक बनने का दिखावा कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि किसी की राजनीति से सनातन धर्म टूटने वाला नहीं है और यह धर्म अपनी परंपरा और मूल्यों के साथ हमेशा मजबूत बना रहेगा।