क्या गंजम के लोक कलाकार सीमांचल पात्रा को पद्मश्री सम्मान मिला?
सारांश
Key Takeaways
- सीमांचल पात्रा का पद्मश्री पुरस्कार ओडिशा के लिए गर्व की बात है।
- उनकी मेहनत ने लोक कला को नया जीवन दिया है।
- गांव बामोकेई में खुशी का माहौल है।
- यह पुरस्कार अन्य लोक कलाकारों के लिए प्रेरणा बनेगा।
- सीमांचल पात्रा ने नौ दशकों तक लोक कला को सहेजा है।
गंजम, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ओडिशा के गंजम जिला के प्रसिद्ध लोक कलाकार सीमांचल पात्रा को कला और संस्कृति के क्षेत्र में उनके अद्वितीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया है।
केंद्र सरकार ने रविवार को पद्म पुरस्कारों की घोषणा की, जिसमें इस साल ओडिशा की चार प्रमुख हस्तियों का नाम शामिल किया गया है। सीमांचल पात्रा का नाम उनके जीवनभर के समर्पण के कारण पारंपरिक लोक नाट्य को संरक्षित और बढ़ावा देने में चुना गया है।
लगभग नौ दशकों से लोक कला की सेवा कर रहे 90 वर्षीय सीमांचल पात्रा ओडिशा के पारंपरिक प्रह्लाद नाटक के सर्वाधिक प्रमुख गुरुओं में माने जाते हैं। उन्होंने न केवल इस कला को जीवित रखा, बल्कि नई पीढ़ी को प्रशिक्षित करके इसे आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके शिष्यों की संख्या आज सैकड़ों में है, जो राज्य के विभिन्न हिस्सों में लोक नाट्य की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
पुरस्कार की घोषणा के बाद गंजम जिले के दिगापहांडी ब्लॉक स्थित उनके पैतृक गांव बामोकेई में खुशी और उत्साह का माहौल देखने को मिला। गांव के लोग, रिश्तेदार और शुभचिंतक बड़ी संख्या में उनके घर पहुंचे और मिठाइयां बांटकर खुशी व्यक्त की। उनके घर के बाहर बधाई देने वालों की लंबी कतारें लगीं और पूरा गांव गर्व से झूम उठा।
स्थानीय निवासियों और परिवार के सदस्यों ने कहा कि यह सम्मान दशकों की तपस्या और साधना का परिणाम है। उनका मानना है कि इस उपलब्धि से न केवल बामोकेई गांव बल्कि पूरे गंजम जिले और ओडिशा राज्य का नाम रोशन हुआ है। कला प्रेमियों का कहना है कि सीमांचल पात्रा को मिला यह पद्म श्री पुरस्कार लोक कलाकारों के लिए एक बड़ी प्रेरणा साबित होगा।
सीमांचल पात्रा ने राष्ट्र प्रेस को बताया, "मैं बहुत खुश हूं। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करता हूं।"
पड़ोसी बापी प्रधान ने राष्ट्र प्रेस को बताया, "सीमांचल पात्रा जी को पद्मश्री पुरस्कार मिला है, जो हमारे गांव के हैं, इसलिए मैं बहुत खुश हूं। उनकी उम्र करीब 90 साल है। 50-60 साल की उम्र तक उन्होंने हिरण्यकश्यप का रोल किया। मैं प्रधानमंत्री मोदी को इतने छोटे से गांव के किसी व्यक्ति को इतना बड़ा सम्मान देने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं।"
पड़ोसी श्रीनु प्रधान ने राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए कहा, "सीमांचल पात्रा का सम्मान मिल रहा है। हमारे गांव के लिए गर्व की बात है। हम लोग बहुत खुश हैं। सरकार को हम लोग धन्यवाद देते हैं।"