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क्या हैं एम.एम. कीरावणी, जिन्हें गणतंत्र दिवस पर वंदे मातरम् को नए रूप में पेश करने का मिला मौका?

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क्या हैं एम.एम. कीरावणी, जिन्हें गणतंत्र दिवस पर वंदे मातरम् को नए रूप में पेश करने का मिला मौका?

सारांश

गणतंत्र दिवस 2026 पर 'वंदे मातरम्' की 150वीं वर्षगांठ पर एम.एम. कीरावणी का संगीत होगा। जानें उनकी यात्रा और भावनाओं की अभिव्यक्ति।

मुख्य बातें

गणतंत्र दिवस 2026 पर 'वंदे मातरम्' का नया स्वर एम.एम.
कीरावणी का अद्वितीय संगीत 150वीं वर्षगांठ का विशेष आयोजन 2500 कलाकारों का योगदान भारतीय संगीत का गर्व

मुंबई, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्ष 2026 का गणतंत्र दिवस विशेष होने वाला है। पूरे देश की नजरें नई दिल्ली पर रहेंगी, जहां इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक भव्य परेड का आयोजन किया जाएगा। इस बार राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर इसे एक नए स्वर और रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।

इस ऐतिहासिक प्रस्तुति के लिए भारत के प्रसिद्ध संगीतकार और ऑस्कर विजेता एम.एम. कीरावणी का चयन किया गया है। उनका संगीत हमेशा श्रोताओं के दिलों को छू लेता है।

एम.एम. कीरावणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ''प्रिय साथियों, वंदे मातरम्! इस गीत की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर, संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड के लिए संगीत रचना करने का अवसर मुझे मिला है। यह भव्य प्रस्तुति देशभर के 2500 कलाकारों द्वारा प्रस्तुत की जाएगी। इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए जुड़े रहिए। आइए, वंदे मातरम् का उत्सव मनाएं।''

एम.एम. कीरावणी का जन्म 4 जुलाई 1961 को आंध्र प्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले के कोव्वुर में हुआ था। उनका पूरा नाम कोडुरी मारकथमणि कीरावणी है। उनका परिवार फिल्मी पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ है। उनके पिता कोडुरी शिव शक्ति दत्ता एक प्रसिद्ध गीतकार और पटकथा लेखक थे। एस.एस. राजामौली और एम.एम. श्रीलेखा उनके कजिन हैं।

उनका भाई म्यूजिक डायरेक्टर कल्याणी मलिक हैं। उनकी पत्नी एम.एम. श्रीवल्ली एक फिल्म प्रोड्यूसर हैं और उनके दोनों बेटे संगीत और अभिनय के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इस प्रकार उनका परिवार फिल्म और संगीत से गहराई से जुड़ा हुआ है।

कीरावणी ने 1987 में अपने करियर की शुरुआत सहायक संगीत निर्देशक के रूप में की। उन्होंने तेलुगु संगीतकार के. चक्रवर्ती और मलयालम संगीतकार सी. राजमणि के साथ काम किया। स्वतंत्र संगीतकार के रूप में उन्हें पहला मौका फिल्म 'कल्कि' (1990) से मिला, लेकिन यह फिल्म रिलीज नहीं हुई। उनकी किस्मत तब बदलती है जब 1991 में राम गोपाल वर्मा की फिल्म 'क्षण क्षणम' रिलीज होती है। इस फिल्म के सभी गाने हिट हो जाते हैं और कीरावणी ने दक्षिण भारतीय सिनेमा में अपनी पहचान बनाई। इसके बाद उन्होंने लगातार साउथ फिल्मों के लिए चार्टबस्टर गाने दिए।

कीरावणी का बॉलीवुड में डेब्यू 1994 में फिल्म 'क्रिमिनल' से हुआ। इसके बाद उन्होंने 'जख्म', 'साया', 'सुर', 'जिस्म', और 'पहेली' जैसी हिंदी फिल्मों में संगीत दिया। उनके गाने 'गली में आज चांद निकला', 'जादू है नशा है', और 'आवारापन बंजारापन' को दर्शकों ने बेहद पसंद किया। हालांकि उनके संगीत को अंतरराष्ट्रीय पहचान 2022 में मिली, जब एस.एस. राजामौली की फिल्म 'आरआरआर' के गाने 'नाटू नाटू' ने गोल्डन ग्लोब और ऑस्कर अवार्ड जीतकर भारत का नाम रोशन किया।

अपने करियर में कीरावणी को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले हैं। इनमें एक ऑस्कर अवार्ड, एक गोल्डन ग्लोब, दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, ग्यारह नंदी पुरस्कार और आठ फिल्मफेयर अवार्ड शामिल हैं। इसके अलावा, उन्हें भारत सरकार ने 2023 में पद्म श्री से भी सम्मानित किया था।

एम.एम. कीरावणी का संगीत केवल धुन नहीं, बल्कि भावनाओं की अभिव्यक्ति है। इस बार गणतंत्र दिवस पर 'वंदे मातरम्' को उनके स्वर में सुनना देशवासियों के लिए गर्व का पल होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमारा मानना है कि एम.एम. कीरावणी का संगीत न केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है, बल्कि यह युवा पीढ़ी को प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। गणतंत्र दिवस पर 'वंदे मातरम्' को नए स्वर में पेश करना एक गर्व का क्षण है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एम.एम. कीरावणी का जन्म कब हुआ?
एम.एम. कीरावणी का जन्म 4 जुलाई 1961 को हुआ।
उनका परिवार किस क्षेत्र से जुड़ा है?
उनका परिवार फिल्म और संगीत के क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कब की?
उन्होंने 1987 में सहायक संगीत निर्देशक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की।
कौन सी फिल्म ने उनकी किस्मत बदली?
1991 में रिलीज हुई फिल्म 'क्षण क्षणम' ने उनकी किस्मत बदली।
उन्हें कितने पुरस्कार मिले हैं?
उन्हें एक ऑस्कर, एक गोल्डन ग्लोब, और कई अन्य पुरस्कार मिले हैं।
राष्ट्र प्रेस
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