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क्या गौरीगणेश चतुर्थी विघ्नहर्ता को प्रसन्न करने का उत्तम दिन है?

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क्या गौरीगणेश चतुर्थी विघ्नहर्ता को प्रसन्न करने का उत्तम दिन है?

सारांश

गौरीगणेश चतुर्थी एक विशेष दिन है, जब भगवान गणेश के गौरी स्वरूप की पूजा की जाती है। इस दिन के शुभ मुहूर्त और पूजा विधियों के बारे में जानें।

मुख्य बातें

गौरीगणेश चतुर्थी भगवान गणेश की पूजा विधि जानें।
शुभ मुहूर्त का ध्यान रखें।
गणेश जी से समृद्धि की प्रार्थना करें।

नई दिल्ली, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। माघ मास की शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि गुरुवार को आ रही है, जिसे गौरीगणेश चतुर्थी के नाम से पहचाना जाता है। यह दिन भगवान गणेश के गौरीगणेश स्वरूप की पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। हिंदू धर्म में गणेश जी को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देवता के रूप में पूजा जाता है।

इस खास दिन पर व्रत, पूजन, जप, तप, स्नान, दान और हवन जैसे शुभ कार्य सहस्रगुणा फल देते हैं। मुद्गल पुराण और भविष्य पुराण में चतुर्थी व्रत को सभी इच्छाओं की पूर्ति का साधन बताया गया है। श्रद्धा से इस व्रत को करने से गणेश भक्ति के साथ जीवन में सुख और समृद्धि प्राप्त होती है और सभी प्रकार के विघ्न दूर होते हैं।

सनातन धर्म में किसी भी पूजा या नए कार्य की शुरुआत से पहले पंचांग का ध्यान रखना आवश्यक है। दृक पंचांग के अनुसार, शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 23 जनवरी की सुबह 2:28 बजे तक रहेगी। शतभिषा नक्षत्र दोपहर 2:27 बजे तक रहेगा, उसके बाद पूर्व भाद्रपद शुरू होगा। योग वरीयान् शाम 5:38 बजे तक रहेगा। वहीं, चंद्रमा कुंभ राशि में संचरण करेंगे। सूर्योदय 7:14 बजे और सूर्यास्त शाम 5:52 बजे होगा।

शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:27 बजे से 6:20 बजे तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:12 बजे से 12:54 बजे तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2:19 बजे से 3:02 बजे तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 5:49 बजे से 6:16 बजे तक होगा। मध्याह्न काल में गणेश पूजन करना विशेष रूप से फलदायी रहता है। रवि योग सुबह 7:14 बजे से दोपहर 2:27 बजे तक है।

अशुभ समय का ध्यान रखना भी अनिवार्य है। राहुकाल दोपहर 1:53 बजे से 3:12 बजे तक रहेगा, इस दौरान कोई शुभ कार्य न करें। यमगण्ड सुबह 7:14 बजे से 8:33 बजे तक है। पूरे दिन पंचक का प्रभाव रहेगा।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, गौरी पुत्र गणेश की पूजा से जीवन के हर क्षेत्र में आने वाली समस्याएं दूर होती हैं। किसी भी मांगलिक कार्य की शुरुआत में गणेश पूजन अनिवार्य माना जाता है। गौरी गणेश चतुर्थी के दिन गजानन का विधि-विधान से पूजन करें, ओम गं गणपतये नम: का जप करें और उनके 12 नामों का उच्चारण करें। गणपति को दुर्वा, बेलपत्र चढ़ाकर मोदक और लड्डू का भोग लगाएं। गणेश अथर्वशीर्ष और संकटनाशन स्त्रोत का पाठ भी फलदायी होता है।

इसके अलावा, गुरुवार को शक्ति की पूजा के लिए समर्पित गुप्त नवरात्रि का चौथा दिन है। इस दिन मां भुनेश्वरी और मां छिन्नमस्ता की पूजा का विधान है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो भगवान गणेश की आराधना का दिन है। इस दिन की पूजा विधियों और शुभ मुहूर्त का ध्यान रखकर भक्तगण अपने जीवन में सुख और समृद्धि की प्राप्ति कर सकते हैं। इस तरह के पर्व भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं और समाज में सकारात्मकता का संचार करते हैं।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गौरीगणेश चतुर्थी कब है?
गौरीगणेश चतुर्थी माघ मास की शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि को पड़ती है। इस वर्ष यह 23 जनवरी को है।
गौरीगणेश चतुर्थी पर क्या करना चाहिए?
इस दिन गणेश जी की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए और ओम गं गणपतये नम: का जप करना चाहिए।
गौरीगणेश चतुर्थी के लिए शुभ मुहूर्त क्या है?
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:27 से 6:20 बजे, अभिजित मुहूर्त 12:12 से 12:54 बजे, और विजय मुहूर्त 2:19 से 3:02 बजे तक है।
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