क्या गोवा अग्निकांड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने तीन राज्यों में छापेमारी की?
सारांश
Key Takeaways
- ईडी ने गोवा, नई दिल्ली और गुरुग्राम में छापेमारी की।
- नाइटक्लब में आग हादसे में 25 लोगों की मौत हुई थी।
- तलाशी में फर्जी दस्तावेजों का खुलासा हुआ।
- आर्थिक लेन-देन में अनियमितताएं पाई गईं।
- ईडी की जांच में भ्रष्टाचार के पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
नई दिल्ली, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पणजी जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएणएलए), २००२ के तहत एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए गोवा, नई दिल्ली और गुरुग्राम में कुल नौ ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई सौरभ लूथरा और अन्य के खिलाफ चल रही जांच के संदर्भ में की गई। तलाशी में अरपोरा-नागाओ पंचायत के सरपंच और सचिव के परिसरों को भी शामिल किया गया है।
ईडी की यह जांच गोवा के अरपोरा स्थित एक नाइटक्लब के मालिकों से संबंधित कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामलों को लेकर है। इसी नाइटक्लब में हुए एक भीषण आग हादसे में २५ लोगों की जान चली गई थी।
ईडी ने बताया कि जांच की शुरुआत गोवा पुलिस द्वारा दर्ज की गई दो एफआईआर के आधार पर की गई, जिनमें पीएमएलए के तहत अनुसूचित अपराध शामिल हैं। तलाशी के दौरान वैधानिक नियमों के पालन में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। जांच में यह सामने आया है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाइसेंस प्राप्त किए गए और आवश्यक अनुमतियों के बिना व्यावसायिक गतिविधियां लगातार संचालित की जा रही थीं।
तलाशी के दौरान यह भी पता चला कि क्लब का संचालन करने वाली इकाई ने वित्तीय वर्ष २०२३-२४ और २०२४-२५ में लगभग २२ करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया। प्रारंभिक तौर पर इस आय को 'अपराध की आय' माना जा रहा है, क्योंकि नाइटक्लब आवश्यक वैधानिक लाइसेंसों के बिना और विभिन्न विभागों से प्राप्त फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्रों के आधार पर संचालित हो रहा था।
ईडी को तलाशी के दौरान समूह की विभिन्न इकाइयों के माध्यम से किए गए विदेशी धन प्रेषण (फॉरेन रेमिटेंस) से जुड़े सबूत भी मिले हैं। इन लेन-देन में प्रासंगिक कानूनों के उल्लंघन की आशंका जताई जा रही है, जिसका विवरण जांच में शामिल है। यह भी सामने आया है कि अवैध रूप से संचालित प्रतिष्ठान से अर्जित करोड़ों रुपए की राशि को व्यक्तिगत बैंक खातों और अन्य समूह कंपनियों के खातों में स्थानांतरित किया गया।
तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं। इसके अलावा, जिन व्यक्तियों और संस्थाओं पर अपराध की आय रखने का संदेह है, उनके बैंक खातों को पीएमएलए, २००२ के तहत फ्रीज कर दिया गया है।
ईडी की जांच अब संभावित भ्रष्टाचार के पहलुओं और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों द्वारा अपराध की आय को ठिकाने लगाने की भूमिका पर भी केंद्रित है। गोवा पुलिस ने इस मामले में हाल ही में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रवर्तन निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि मामले की आगे की जांच जारी है।