गोपालगंज में गैस सिलेंडर विस्फोट से भीषण आग, 20 लोग झुलसे; 5 आईसीयू में भर्ती
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के गोपालगंज जिले के सफियाबाद गांव में मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को गैस सिलेंडर में आग लगने के बाद हुए विस्फोट से एक घर में भीषण आग फैल गई, जिसमें 20 लोग झुलसकर घायल हो गए। घायलों में महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक बताई जा रही है। 17 घायलों को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि पाँच लोगों की हालत नाजुक बताई जा रही है और उन्हें आईसीयू में रखा गया है।
घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा
यह हादसा बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के सफियाबाद गांव में हुआ। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गांव निवासी प्रेमनाथ मांझी के घर हाल ही में एक नया गैस सिलेंडर आया था। घर में दीया जलाने के दौरान अचानक सिलेंडर में आग लग गई।
देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और सिलेंडर में जोरदार विस्फोट हो गया। उस समय घर में मौजूद कई लोग इसकी चपेट में आ गए। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों ने मिलकर झुलसे हुए लोगों को तत्काल अस्पताल पहुँचाया।
घायलों की स्थिति
घायलों में शिलानाथ मांझी, कुसुम देवी, नेहा कुमारी, पिंकी कुमारी, कंचन कुमारी, चमेली कुमारी, कुंदन कुमार, आयोग कुमार और बेबी देवी समेत अन्य लोग शामिल हैं। इनमें से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
सिविल सर्जन मोहम्मद इजरायल ने बताया कि हादसे में झुलसे पाँच लोगों की स्थिति नाजुक है और उन्हें आईसीयू में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। शेष घायलों का भी अस्पताल में उपचार जारी है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना की सूचना मिलते ही गोपालगंज के जिलाधिकारी समीर सौरभ खुद सदर अस्पताल पहुँचे और वहाँ कैंप कर घायलों के इलाज की व्यवस्था की निगरानी करने लगे। जिलाधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार गैस सिलेंडर से आग लगने के कारण यह हादसा हुआ है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता सभी घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। घटना के कारणों की विस्तृत जाँच भी कराई जा रही है।
आम जनता पर असर
यह हादसा ग्रामीण क्षेत्रों में गैस सिलेंडर के असुरक्षित उपयोग और उससे जुड़े जोखिमों को फिर से उजागर करता है। गौरतलब है कि बिहार के ग्रामीण इलाकों में इस तरह के हादसे अक्सर तब होते हैं जब पुराने या क्षतिग्रस्त सिलेंडर का उपयोग घर के भीतर खुले दीपक या चूल्हे के साथ होता है।
झुलसे हुए लोगों में महिलाओं और बच्चों की अधिक संख्या इस बात का संकेत है कि हादसे के वक्त घर के भीतरी हिस्से में परिवार के सदस्य मौजूद थे। गंभीर रूप से जले मरीजों के उपचार के लिए उन्नत बर्न केयर की उपलब्धता एक अहम चुनौती बनी हुई है।
क्या होगा आगे
जिला प्रशासन ने घटना की जाँच शुरू कर दी है। आईसीयू में भर्ती पाँच नाजुक मरीजों की स्थिति पर निगाह रखी जा रही है। यदि उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ, तो उन्हें उच्च-स्तरीय चिकित्सा केंद्र रेफर किया जा सकता है।