क्या गुजरात का दुधाला गांव सौर ऊर्जा के जरिए बिल शून्य करने में सफल हुआ है?

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क्या गुजरात का दुधाला गांव सौर ऊर्जा के जरिए बिल शून्य करने में सफल हुआ है?

सारांश

गुजरात के दुधाला गांव ने सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली बिल को शून्य पर लाकर एक नई मिसाल पेश की है। यहां के निवासी अब बिना किसी चिंता के बिजली का उपयोग कर रहे हैं। यह गांव सौर ऊर्जा के सही उपयोग का जीवंत उदाहरण बन चुका है।

Key Takeaways

  • दुधाला गांव का बिजली बिल शून्य है।
  • सोलर पावर से गांव के 400 घर रोशन हैं।
  • गांव में सौर ऊर्जा के उपयोग से आत्मनिर्भरता बढ़ी है।
  • सरकार की सब्सिडी का सही उपयोग आवश्यक है।
  • यह गांव अन्य गांवों के लिए एक प्रेरणा है।

अमरेली, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात के अमरेली जिले का दुधाला गांव अपनी सौर ऊर्जा क्रांति के लिए मशहूर हो चुका है। यहाँ की 2000 से अधिक आबादी वाले इस लाठी तालुका के गांव में 400 से ज्यादा घर अब सोलर पावर से रोशन हैं। पिछले तीन वर्षों से यहां के निवासियों का बिजली बिल शून्य आ रहा है, जिसका श्रेय सूरत के उद्योगपति गोविंदभाई ढोलकिया को जाता है।

गोविंदभाई ढोलकिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देने वाले अभियान से प्रेरित होकर प्रत्येक घर में मुफ्त सोलर सिस्टम लगवाने का कार्य किया।

पहले गांव के लोग हर महीने 1000 से 1500 रुपए तक बिजली के बिल चुकाते थे। महंगे बिल के कारण कई लोग पंखा, लाइट या फ्रिज का इस्तेमाल भी कम करते थे, लेकिन जब से हर घर में सोलर सिस्टम लगा है, तब से लोग बिना किसी हिचकिचाहट के अपने सभी इलेक्ट्रिक उपकरण का उपयोग कर रहे हैं और फिर भी उनका बिल शून्य आ रहा है। यह बदलाव उनकी जिंदगी में साफ देखा जा सकता है।

गांव के निवासी अशोकभाई शेलिया बताते हैं कि सोलर सिस्टम ने पूरे गांव की बिजली की समस्या का समाधान कर दिया है। हमारे गांव में पहले बिजली के खर्चे काफी ज्यादा थे। अब हम बिना किसी चिंता के बिजली का उपयोग कर सकते हैं। बच्चों के लिए पढ़ाई की लाइट, घर में फ्रिज और पंखा चलाना अब सरल हो गया है।

वहीं जयराज बराड़ का कहना है कि उनके घर में एक किलोवॉट वाला सोलर सिस्टम लगाया गया है। पहले उन्हें हर महीने करीब 1000 से 1500 रुपए बिजली बिल पर खर्च करना पड़ता था, लेकिन अब उनका बिल शून्य है। इससे उनके घर की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हुई है।

स्थानीय बुजुर्ग पुरुषोत्तमभाई बराड़ कहते हैं कि पूरे गुजरात में हमारे गांव जैसा कोई गांव नहीं है। यहां हर घर को सोलर ऊर्जा का लाभ मिल रहा है। हमें भी इसका बहुत फायदा मिला है।

दुधाला गांव में केवल घर ही नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत, चौपाल, स्कूल और मंदिर भी अब सोलर एनर्जी से संचालित हो रहे हैं। इससे पूरे गांव का बिजली खर्च शून्य हो गया है और लोग अब ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बन गए हैं। यह गांव अब सबके लिए एक उदाहरण बन चुका है कि किस तरह सौर ऊर्जा के सही उपयोग से बिजली के बिल से मुक्ति पाई जा सकती है और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग आर्थिक रूप से मजबूत बन सकते हैं।

यदि सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी का पूरा लाभ उठाया जाए तो हर गांव को दुधाला की तरह सोलर गांव बनाया जा सकता है। इससे न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की बचत होगी, बल्कि लोगों पर आर्थिक बोझ भी कम पड़ेगा। सौर ऊर्जा की ओर कदम बढ़ाना ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जीवन स्तर दोनों के लिए लाभकारी है।

Point of View

बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाती है। इस पहल से अन्य गांवों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए।
NationPress
29/11/2025

Frequently Asked Questions

दुधाला गांव में सोलर सिस्टम किसने लगाया?
सोलर सिस्टम लगाने का कार्य सूरत के उद्योगपति गोविंदभाई ढोलकिया ने किया।
दुधाला गांव में बिजली बिल क्यों शून्य है?
दुधाला गांव के सभी घरों में सोलर सिस्टम लगने के कारण उनका बिजली बिल शून्य आ रहा है।
क्या अन्य गांव भी ऐसा कर सकते हैं?
हां, यदि सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी का सही उपयोग किया जाए तो अन्य गांव भी दुधाला की तरह सौर ऊर्जा का लाभ उठा सकते हैं।
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