क्या असम के मुख्यमंत्री ने ईडी की छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी के व्यवहार की आलोचना की?

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क्या असम के मुख्यमंत्री ने ईडी की छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी के व्यवहार की आलोचना की?

सारांश

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने ममता बनर्जी के ईडी छापे के दौरान आचरण की कठोर आलोचना की। क्या यह राजनीतिक प्रतिशोध है?

Key Takeaways

  • हिमंता बिस्वा सरमा ने ममता बनर्जी के व्यवहार की आलोचना की।
  • ईडी की छापेमारी राजनीतिक विवादों का हिस्सा है।
  • तृणमूल कांग्रेस ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया।
  • अगली सुनवाई 14 जनवरी को होगी।
  • संवैधानिक लोकतंत्र पर विश्वास को चुनौती मिल रही है।

गुवाहाटी, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला किया। उन्होंने टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के हालिया राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पैक के कोलकाता स्थित कार्यालय पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के दौरान और उसके बाद उनके आचरण की कड़ी आलोचना की।

मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि ईडी की कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री बनर्जी के व्यवहार ने औचित्य और संवैधानिक आचरण के बारे में गंभीर चिंताएं उत्पन्न की हैं।

उन्होंने कहा, "जिस प्रकार का व्यवहार वह दिखाती हैं, अपराध स्थल पर उनका आचरण, जिस तरह से उन्होंने आधिकारिक फाइलें ले लीं और केंद्रीय गृह मंत्री के खिलाफ अनुचित भाषा का उपयोग किया, यह अत्यंत चिंताजनक है।"

मुख्यमंत्री शर्मा ने आगे कहा कि एक सेवारत मुख्यमंत्री द्वारा इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक संस्थानों में जनता के विश्वास को कमजोर कर सकती है।

उन्होंने कहा, "इस तरह के आचरण से उनके पद के प्रति जनता का सम्मान घटने की संभावना है। मैं इस पर और टिप्पणी नहीं करना चाहता, लेकिन यह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक मुख्यमंत्री फाइलों को जब्त करने और कथित तौर पर व्यक्तियों को हिरासत में लेने का सहारा लेती हैं। यह संवैधानिक लोकतंत्र में स्वीकार्य सीमा से बहुत परे है।"

यह विवाद आई-पैक के कोलकाता कार्यालय में चल रही जांच के सिलसिले में ईडी द्वारा की गई तलाशी के बाद सामने आया है, जिसके बाद मुख्यमंत्री बनर्जी ने व्यक्तिगत रूप से परिसर का दौरा किया था।

उन्होंने केंद्रीय एजेंसी पर केंद्र सरकार के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया और कहा कि ये छापे राजनीतिक रूप से प्रेरित थे।

तृणमूल ने इसके बाद ईडी की कार्रवाई को केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के पैटर्न से जोड़ा है, जिसका इस्तेमाल विपक्षी नेताओं और पार्टियों को परेशान करने के लिए किया जाता है।

मुख्यमंत्री बनर्जी की पार्टी ने गुरुवार को अदालत का रुख करते हुए छापेमारी की वैधता और केंद्रीय एजेंसियों के आचरण को चुनौती दी।

तृणमूल के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार के बीच अदालती लड़ाई जल्द शुरू होने की उम्मीद है।

इस बीच, ईडी ने यह बनाए रखा है कि उसकी कार्रवाई पूरी तरह से कानून के अनुसार और सबूतों पर आधारित है, और यह दोहराया है कि जांच स्वतंत्र रूप से और बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के की जाती है।

केंद्रीय जांच एजेंसी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय से भी संपर्क किया था।

हालांकि, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को मामले की तत्काल सुनवाई के लिए ईडी की याचिका को खारिज कर दिया।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की अध्यक्षता वाली पीठ ने तत्काल सुनवाई के लिए याचिका दायर की, क्योंकि सुनवाई शुरू होने के समय न्यायालय में अत्यधिक भीड़ होने के कारण न्यायमूर्ति सुव्रा घोष की एकल-न्यायाधीश पीठ में सुनवाई नहीं हो सकी थी।

न्यायमूर्ति घोष के न्यायालय कक्ष से चले जाने के बाद, अगली सुनवाई की तारीख 14 जनवरी निर्धारित की गई।

Point of View

यह स्पष्ट है कि राजनीतिक प्रतिशोध की भावना और लोकतांत्रिक संस्थानों की विश्वसनीयता दोनों ही सवालों के घेरे में हैं। असम और पश्चिम बंगाल के बीच का यह विवाद न केवल राजनीतिक है, बल्कि यह संविधान और लोकतंत्र की मूलभूत संरचना को भी प्रभावित कर सकता है।
NationPress
10/01/2026

Frequently Asked Questions

ईडी की छापेमारी का मुख्य उद्देश्य क्या था?
ईडी की छापेमारी का उद्देश्य आई-पैक के खिलाफ चल रही जांच के तहत साक्ष्य जुटाना था।
ममता बनर्जी ने ईडी पर क्या आरोप लगाया?
ममता बनर्जी ने ईडी पर आरोप लगाया कि यह केंद्रीय सरकार के इशारों पर काम कर रही है।
क्या इस विवाद के राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं?
हां, यह विवाद असम और पश्चिम बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।
ईडी की कार्रवाई का क्या अर्थ है?
ईडी की कार्रवाई का मतलब है कि राजनीतिक जांच और साक्ष्य इकट्ठा करना है।
क्या इस मामले में अदालत की सुनवाई हो रही है?
हां, इस मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय में सुनवाई हो रही है।
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