क्या भारत की कॉफी इंडस्ट्री 2028 तक 8.9 प्रतिशत के सीएजीआर से बढ़ेगी?

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क्या भारत की कॉफी इंडस्ट्री 2028 तक 8.9 प्रतिशत के सीएजीआर से बढ़ेगी?

सारांश

भारत की कॉफी उद्योग तेजी से विकसित हो रही है, जो वैश्विक मार्केट में महत्वपूर्ण स्थान बना रही है। कॉफी का उत्पादन, निर्यात, और बढ़ती मांग इस उद्योग के उज्ज्वल भविष्य का संकेत देती है। जानिए भारत की कॉफी इंडस्ट्री का क्या है भविष्य 2028 तक।

Key Takeaways

  • भारत कॉफी का सातवां सबसे बड़ा उत्पादक है।
  • कॉफी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु मुख्य उत्पादन राज्य हैं।
  • भारत का कॉफी निर्यात लगातार बढ़ रहा है।
  • जीएसटी में कटौती से घरेलू बाजार को बढ़ावा मिलेगा।

नई दिल्ली, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया के अनुसार, भारत कॉफी के उत्पादन में सातवां सबसे बड़ा देश है और वैश्विक कॉफी उत्पादन में लगभग 3.5 प्रतिशत का योगदान देता है। देश हर वर्ष लगभग 3.6 लाख टन कॉफी उत्पादित करता है, जिसमें से लगभग 70 प्रतिशत का निर्यात 128 देशों में किया जाता है, जो भारतीय कॉफी की बढ़ती वैश्विक मांग को दर्शाता है।

केंद्र के अनुसार, कॉफी क्षेत्र भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह क्षेत्र दो मिलियन से अधिक लोगों की रोजी-रोटी चलाता है, जो खेती, प्रोसेसिंग और व्यापार में संलग्न हैं।

भारत में कॉफी उद्योग मुख्य रूप से कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु जैसे बड़े कॉफी उत्पादन राज्यों में है, जो मिलकर देश के कुल कॉफी उत्पादन का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं।

इनमें कर्नाटक 2,80,275 मीट्रिक टन के उत्पादन के साथ सबसे आगे है, जबकि केरल और तमिलनाडु इसके बाद आते हैं।

भारत कॉफी बनाने वाले देशों में पांचवां सबसे बड़ा कॉफी निर्यातक है और विश्वभर से होने वाले कुल कॉफी निर्यात में इसका हिस्सा लगभग 5 प्रतिशत है। पिछले चार वर्षों में भारत का कॉफी निर्यात हमेशा अमेरिकी डॉलर 1 अरब से अधिक रहा है, जो वित्त वर्ष 2024-25 में रिकॉर्ड अमेरिकी डॉलर 1.8 अरब तक पहुंच गया है। यह पिछले वर्ष के 1.29 अरब अमेरिकी डॉलर से 40 प्रतिशत की शानदार बढ़त को दर्शाता है।

वैश्विक भू-राजनैतिक चुनौतियों के बावजूद, भारत का निर्यात इस वर्ष अप्रैल से सितंबर की अवधि में 1.07 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो 2025 की समान अवधि की तुलना में 15.5 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।

कॉफी का आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक है। भारतीय कॉफी के लिए शीर्ष 5 निर्यात गंतव्यों में इटली, जर्मनी, बेल्जियम, रशियन फेडरेशन और यूनाइटेड अरब अमीरात शामिल हैं।

हाल ही में केंद्र ने कॉफी एक्सट्रैक्ट, एसेंस और इंस्टेंट कॉफी पर जीएसटी की दर को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। यह देश के कॉफी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे घरेलू बाजार मजबूत होगा और भारत में प्रति व्यक्ति कॉफी की खपत में वृद्धि होगी।

भारत की तेजी से बढ़ती कॉफी उद्योग का भविष्य भी उज्ज्वल है। अनुमान है कि 2028 तक पूरा मार्केट 8.9 प्रतिशत के सीएजीआर से बढ़ेगा। इसके अलावा, कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया ने 2047 तक देश में कॉफी उत्पादन को 9 लाख टन तक बढ़ाने का एक बड़ा लक्ष्य रखा है।

Point of View

जो न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा दे रही है बल्कि वैश्विक मंच पर भी अपनी पहचान बना रही है। यह एक महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि है और इसके भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
NationPress
29/11/2025

Frequently Asked Questions

भारत में कॉफी का मुख्य उत्पादन क्षेत्र कौन सा है?
भारत में कॉफी का मुख्य उत्पादन क्षेत्र कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु हैं।
भारत का कॉफी निर्यात कितना है?
भारत का कॉफी निर्यात पिछले चार वर्षों में अमेरिकी डॉलर 1 अरब से अधिक रहा है।
कॉफी उद्योग में कितने लोग काम करते हैं?
कॉफी क्षेत्र में दो मिलियन से अधिक लोग काम करते हैं।
भारत की कॉफी इंडस्ट्री का भविष्य कैसा है?
भारत की कॉफी इंडस्ट्री का भविष्य उज्ज्वल है और 2028 तक 8.9 प्रतिशत के सीएजीआर से बढ़ने का अनुमान है।
कॉफी पर जीएसटी की दर क्या है?
हाल ही में कॉफी एक्सट्रैक्ट, एसेंस और इंस्टेंट कॉफी पर जीएसटी की दर को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है।
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