क्या ओडिशा में पीयूसी लागू करने में अराजकता है?

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क्या ओडिशा में पीयूसी लागू करने में अराजकता है?

सारांश

ओडिशा सरकार की पीयूसी नियमों में अराजकता पर बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक का आरोप। क्या यह सरकार की असंवेदनशीलता का संकेत है? जानिए पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • ओडिशा सरकार की पीयूसी नीति में असंगति
  • जनता को परेशान करने वाले नियम
  • नवीन पटनायक का विरोध और मांगें
  • सरकार की योजना में कमी
  • जनहित में निर्णय लेने की आवश्यकता

भुवनेश्वर, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। विपक्ष के नेता और बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक ने शुक्रवार को ओडिशा सरकार पर आरोप लगाया कि प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) के प्रवर्तन में सरकार की भूमिका अराजक और सामान्य जनता के लिए परेशानी पैदा करने वाली रही।

अपने एक्स हैंडल पर पटनायक ने कहा कि भाजपा-शासित ओडिशा सरकार द्वारा पीयूसी प्रमाणपत्र के मुद्दे को संभालने में "भयंकर असंगति" और लगातार "नीति में उलटफेर" दिखाई दिया।

विपक्ष नेता ने राज्य सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि 1 जनवरी, 2026 से लागू किए गए "नो पीयूसी, नो फ्यूल" नियम के अचानक ऐलान से राज्यभर में परीक्षण केंद्रों पर लंबी कतारें लग गईं जिससे आम लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

पटनायक ने कहा, "भाजपा सरकार ने पर्याप्त तैयारी नहीं की, परीक्षण सुविधाओं का विस्तार नहीं किया, कोई अग्रिम योजना नहीं बनाई और आवश्यक पैमाने पर जागरूकता अभियान नहीं चलाया।"

उन्होंने बताया कि जनता की नाराजगी के बाद सरकार ने पहले इसे 1 फरवरी तक स्थगित किया, फिर 31 मार्च तक, और हाल ही में पूर्ण छूट की घोषणा की, जिसमें 1 अप्रैल तक कोई जुर्माना नहीं और टोल गेट पर ई-डिटेक्शन को भी निलंबित कर दिया गया।

बीजद प्रमुख ने कहा, "इन बार-बार के उलटफेर से परिवहन विभाग की असमर्थता और दूरदर्शिता की कमी सामने आती है। ओडिशा के लोगों को बेहतर शासन और ऐसे नीतियों की आवश्यकता है जो बिना किसी परेशानी के लागू हों। वाहन प्रदूषण नियंत्रण महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके लिए नागरिकों को परेशान नहीं किया जा सकता।"

पटनायक ने कहा कि उनकी पार्टी पूरी तरह से जनता के साथ खड़ी है और सरकार की असंगति के खिलाफ विरोध जारी रखेगी। उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि वे अपनी गलतियों से सीखें और जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचें।

बीजद प्रमुख ने मांग की, "पीयूसी परीक्षण सुविधाओं का तुरंत विस्तार किया जाए, प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और संक्रमण काल में लोगों पर कोई अनुचित दंड न लगाया जाए। मैं भाजपा सरकार से आग्रह करता हूँ कि वे इन गलतियों से सीखें और ओडिशा के नागरिकों के कल्याण को अपनी प्राथमिकता बनाएं।"

गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर में ओडिशा सरकार ने रोड सेफ्टी माह (1–31 जनवरी, 2026) के दौरान पीयूसी नियमों को सख्ती से लागू करने की घोषणा की थी और तेल कंपनियों को निर्देश दिया था कि वे बिना वैध पीयूसी प्रमाणपत्र वाले वाहनों को ईंधन न बेचें।

हालांकि, वाहन मालिकों को प्रमाणपत्र प्राप्त करने में कठिनाइयों के चलते यह निर्णय बाद में 1 फरवरी, 2026 तक स्थगित किया गया। नवीनतम विकास में, राज्य सरकार ने पीयूसी जांच पर छूट को 1 अप्रैल तक बढ़ा दिया है।

Point of View

बल्कि सम्पूर्ण देश के लिए महत्वपूर्ण है। जब भी किसी नीति को लागू किया जाता है, तो जनता की भलाई को सर्वोपरि रखना चाहिए। शासन की जिम्मेदारी है कि वे उचित योजना बनाएं और लोगों को किसी भी परेशानी में न डालें।
NationPress
10/01/2026

Frequently Asked Questions

ओडिशा में पीयूसी नियमों का क्या महत्व है?
पीयूसी नियमों का उद्देश्य वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करना है, जो पर्यावरण और जन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
क्या सरकार ने सही समय पर पीयूसी नियम लागू किए?
विपक्ष के अनुसार, सरकार ने उचित तैयारी के बिना नियमों को लागू करने की कोशिश की, जिससे जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
बिजली और तेल कंपनियों का इस मामले में क्या रोल है?
सरकार ने तेल कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे बिना वैध पीयूसी प्रमाणपत्र वाले वाहनों को ईंधन न बेचें।
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