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2030 तक 3,000 मिलियन टन माल ढुलाई क्षमता के लक्ष्य में भारतीय रेलवे की प्रमुख भूमिका: अध्ययन

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2030 तक 3,000 मिलियन टन माल ढुलाई क्षमता के लक्ष्य में भारतीय रेलवे की प्रमुख भूमिका: अध्ययन

सारांश

भारतीय रेलवे की भूमिका भारत की अर्थव्यवस्था को गति देने में महत्वपूर्ण हो रही है। एक अध्ययन के अनुसार, 2030 तक 3,000 मिलियन टन माल ढुलाई क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें रेलवे की केंद्रीय भूमिका होगी।

मुख्य बातें

2030 तक 3,000 मिलियन टन माल ढुलाई क्षमता का लक्ष्य।
भारतीय रेलवे की हिस्सेदारी वर्तमान में 30 प्रतिशत है।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और विद्युतीकरण में सुधार।
31,000 किलोमीटर नई रेल लाइन का विकास।
लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने की आवश्यकता।

नई दिल्ली, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय रेलवे की भूमिका भारत की अर्थव्यवस्था को गति देने में भविष्य में और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 2030 तक 3,000 मिलियन टन माल ढुलाई क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें रेलवे की केंद्रीय भूमिका होगी।

एसोचैम-एईएससीएलए की रिपोर्ट बताती है कि मौजूदा समय में रेलवे की माल ढुलाई में भागीदारी लगभग 30 प्रतिशत है, जो इसके विकास की संभावनाओं को दर्शाता है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि रेलवे क्षेत्र तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएँ और लगभग पूर्ण विद्युतीकरण प्रक्रिया से रेलवे की कार्यक्षमता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी में सुधार हो रहा है। इससे माल ढुलाई का कार्य और तेज, सस्ता तथा अधिक भरोसेमंद हो रहा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए क्षमता विस्तार, फ्रेट कॉरिडोर का और विकास, निजी क्षेत्र की भागीदारी और बेहतर लास्ट-माइल कनेक्टिविटी पर ध्यान देना आवश्यक है।

इसके साथ ही, लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना भी महत्वपूर्ण है, जो वर्तमान में देश की जीडीपी का लगभग 7.97 प्रतिशत है। इसे घटाने से भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी।

रेलवे बोर्ड के ट्रैफिक कमर्शियल के कार्यकारी निदेशक डॉ. सुरेंद्र कुमार अहिरवार ने कहा कि भारतीय रेलवे एक तीव्र परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और भविष्य के लिए एक सक्षम प्रणाली के रूप में विकसित हो रहा है। उन्होंने कहा कि रेलवे केवल आर्थिक विकास को सुगम नहीं बना रहा, बल्कि इसके माध्यम से खुद भी विकास में योगदान दे रहा है।

उन्होंने सुरक्षा में सुधार, क्षमता का विस्तार, नई तकनीकों का उपयोग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कार्यान्वयन और एंड-टू-एंड लॉजिस्टिक्स समाधान को इस परिवर्तन का मुख्य कारण बताया।

अहिरवार ने यह भी कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारतीय रेलवे ने लगभग 31,000 किलोमीटर नई रेल लाइन जोड़ी है, जो इसके बुनियादी ढांचे के विकास की तेजी को दर्शाता है।

वहीं, एसोचैम के रेलवे काउंसिल के सलाहकार संजय बाजपेई ने कहा कि भारतीय रेलवे अब केवल एक पारंपरिक परिवहन माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह लॉजिस्टिक्स दक्षता, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण इंजन बनता जा रहा है। उन्होंने आधुनिक टर्मिनल, बेहतर पोर्ट कनेक्टिविटी और मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने आगे कहा कि भारतीय रेलवे पहले ही सालाना 1.6 अरब टन से अधिक माल ढुलाई कर रहा है और आने वाले समय में इसमें और तेजी आने की संभावना है। बुनियादी ढांचे के विकास, नीतिगत सुधार और डिजिटलीकरण के चलते रेलवे क्षेत्र भारत की आर्थिक प्रगति में एक मजबूत आधार बनकर उभर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि भारतीय रेलवे का विकास न केवल आर्थिक वृद्धि के लिए आवश्यक है, बल्कि यह देश की लॉजिस्टिक्स दक्षता और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय रेलवे का वर्तमान माल ढुलाई प्रतिशत क्या है?
भारतीय रेलवे की वर्तमान में माल ढुलाई में हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है।
2030 तक भारत का माल ढुलाई लक्ष्य क्या है?
भारत ने 2030 तक 3,000 मिलियन टन माल ढुलाई क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
रेलवे में सुधारों के लिए कौन सी परियोजनाएँ महत्वपूर्ण हैं?
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और विद्युतीकरण प्रक्रिया रेलवे में सुधार के लिए महत्वपूर्ण हैं।
भारतीय रेलवे ने पिछले 10 वर्षों में कितनी नई रेल लाइन जोड़ी है?
भारतीय रेलवे ने पिछले 10 वर्षों में लगभग 31,000 किलोमीटर नई रेल लाइन जोड़ी है।
रेलवे की लागत को कम करने का क्या महत्व है?
लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने से भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी।
राष्ट्र प्रेस
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