इंदौर में ब्राउन शुगर के साथ युवक गिरफ्तार, क्राइम ब्रांच ने पकड़ा ₹1.25 लाख का मादक पदार्थ
सारांश
मुख्य बातें
इंदौर की क्राइम ब्रांच ने मंगलवार, 14 अक्टूबर 2026 की देर रात पत्थर गोदाम रोड स्थित पशु चिकित्सालय के सामने गश्त के दौरान यश मकोरे नामक युवक को 12.90 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार किया। बरामद मादक पदार्थ की अनुमानित बाज़ार कीमत लगभग ₹1.25 लाख बताई गई है। मध्य प्रदेश में नशे के खिलाफ जारी अभियान के तहत यह कार्रवाई हुई है।
गिरफ्तारी का घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार क्राइम ब्रांच की टीम जब पत्थर गोदाम रोड, इंदौर पर नियमित चेकिंग कर रही थी, तब एक व्यक्ति बिना नंबर की सफेद मोटरसाइकिल पर संदिग्ध अवस्था में दिखा। पुलिस वाहन देखते ही वह व्यक्ति भागने का प्रयास करने लगा, जिसके बाद टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ा।
पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम यश मकोरे, निवासी थाना छत्रीपुरा, इंदौर बताया। तलाशी के दौरान उसकी जेब से 12.90 ग्राम अवैध मादक पदार्थ ब्राउन शुगर बरामद हुई। मौके पर मोटरसाइकिल भी ज़ब्त की गई।
आरोपी की पृष्ठभूमि
पुलिस सूत्रों के अनुसार यश मकोरे के खिलाफ पहले से ही कई मामले दर्ज हैं। थाना अपराध शाखा, इंदौर में नया प्रकरण भी पंजीबद्ध कर लिया गया है। फिलहाल आरोपी से मादक पदार्थ के स्रोत, सप्लायर नेटवर्क तथा आपूर्ति श्रृंखला के आगे-पीछे के संपर्कों के बारे में विस्तृत पूछताछ जारी है।
क्राइम ब्रांच का 2026 में अब तक का प्रदर्शन
इंदौर क्राइम ब्रांच के आँकड़ों के अनुसार 1 जनवरी 2026 से अब तक एनडीपीएस एक्ट के तहत कुल 77 प्रकरणों में 171 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इन कार्रवाइयों में आरोपियों के कब्जे से 3.0897 किलोग्राम एमडी ड्रग्स, 32.402 किलोग्राम गांजा, 500 किलोग्राम भांग, 385.12 ग्राम ब्राउन शुगर और 10 ग्राम कोकीन सहित कुल लगभग ₹3 करोड़ 99 लाख 86,000 मूल्य के मादक पदार्थ और वाहन ज़ब्त किए गए हैं।
राज्य में व्यापक अभियान
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों की आपूर्ति के खिलाफ लगातार मुहिम चलाई जा रही है। इसी क्रम में मंगलवार को शहडोल जिले में भी पुलिस ने बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद किया। यह अभियान राज्य के विभिन्न हिस्सों में एक साथ संचालित हो रहा है, जो संगठित नशा तस्करी नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश को दर्शाता है।
इंदौर जैसे व्यापारिक केंद्रों में ब्राउन शुगर की बढ़ती तस्करी चिंता का विषय बनी हुई है। आलोचकों का कहना है कि केवल खुदरा स्तर पर गिरफ्तारियाँ तब तक अपर्याप्त रहेंगी, जब तक सप्लायर नेटवर्क की जड़ों तक पहुँचने में सफलता न मिले।