25 जुलाई 2026
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क्या झारखंड में जंगली हाथी का आतंक बढ़ रहा है? एक रात में छह लोगों की मौत

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क्या झारखंड में जंगली हाथी का आतंक बढ़ रहा है? एक रात में छह लोगों की मौत

सारांश

झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में जंगली हाथी के हमले ने गांवों में दहशत फैला दी है। छह लोगों की जान जाने के बाद, प्रशासन ने हाथी को ट्रेंकुलाइज करने की योजना बनाई है। क्या यह समस्या और बढ़ेगी?

मुख्य बातें

जंगली हाथी का आतंक झारखंड के कई गांवों में फैल चुका है।
छह लोगों की जान जाने के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है।
वन विभाग इस समस्या के समाधान के लिए सक्रिय है।
विशेष टीम हाथी की तलाश में जुटी है।
ट्रेंकुलाइज करने का ऑपरेशन शुरू होने वाला है।

पश्चिम सिंहभूम, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में एक आक्रामक जंगली दंतैल हाथी ने भयावह स्थिति उत्पन्न कर दी है। देर रात नोवामुंडी और हाटगमहरिया क्षेत्रों में इस हाथी ने विभिन्न हमलों में छह लोगों की जान ले ली।

इन मृतकों में एक ही परिवार के चार सदस्य शामिल हैं। इस घटना ने पूरे जिले में कोहराम मचा दिया है और ग्रामीणों में भय का माहौल है। चाईबासा के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर आदित्य नारायण ने इसकी पुष्टि की है।

यह हाथी झुंड से बिछड़ गया है और पिछले कुछ दिनों से हिंसक होकर गांवों में घुस रहा है। साल 2026 से इसकी वजह से मौतों का सिलसिला जारी है। अब तक जिले में हाथी के हमलों से नौ से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। मंगलवार रात का हमला सबसे भयावह था। नोवामुंडी क्षेत्र में हाथी ने सोते हुए लोगों पर अचानक धावा बोल दिया, जिसमें एक परिवार के चार सदस्यों समेत छह लोग मारे गए

मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। हाटगमहरिया में भी इसी तरह के हमले हुए, जहां लोग अपने घरों से घसीटकर मारे गए। ग्रामीणों का कहना है कि हाथी दिनभर जंगल में छिपा रहता है और रात होते ही गांवों की ओर निकल पड़ता है। अंधेरे में यह सोते हुए लोगों पर हमला कर रहा है। यह एक बड़ा टस्कर है, यानी इसके लंबे दांत हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, झुंड से अलग होने या हार्मोनल बदलाव के कारण नर हाथी इतना आक्रामक हो जाता है। इस इलाके में सारंडा और कोल्हान के घने जंगलों से हाथी अक्सर निकलते हैं, लेकिन इस बार का हमला बेहद खतरनाक साबित हो रहा है।

वन विभाग की टीम ने पूरी रात हाथी को ट्रैक करने में बिताई। पश्चिम बंगाल से आई विशेष टीम भी जंगलों में तलाश कर रही है। थर्मल सेंसर वाले ड्रोन की मदद भी ली जा रही है, लेकिन अब तक हाथी को पकड़ने में सफलता नहीं मिली। ग्रामीण निहत्थे हैं और रात में घरों में भी सुरक्षित नहीं महसूस कर रहे। कई गांवों में लोग जागकर रात बिता रहे हैं। प्रशासन ने उन्हें सतर्क रहने की चेतावनी दी है।

अब विभाग ने हाथी को शांत करने का योजना बनाई है। बेकाबू हाथी को ट्रेंकुलाइज करने की तैयारी चल रही है। दुनिया के बड़े पशु संरक्षण केंद्रों में से एक वनतारा की टीम से मदद मांगी गई है। सूत्रों के अनुसार, बुधवार से यह ऑपरेशन शुरू हो सकता है। हाथी को दवा देकर बेहोश किया जाएगा, ताकि इसे सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में हाथी के हमले की वजह क्या है?
हाथी का झुंड से बिछड़ना और हार्मोनल बदलाव इसकी आक्रामकता का कारण हो सकता है।
इस घटना में कितने लोग मारे गए?
इस घटना में छह लोगों की जान गई है, जिनमें एक ही परिवार के चार सदस्य शामिल हैं।
प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?
प्रशासन ने हाथी को ट्रेंकुलाइज करने की योजना बनाई है और सुरक्षा के लिए गांवों में चेतावनी दी है।
राष्ट्र प्रेस
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