क्या कर्नाटक हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता की एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज की?
सारांश
Key Takeaways
- कर्नाटक हाईकोर्ट ने राजीव गौड़ा की एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज की।
- महिला अधिकारी को धमकी देने का मामला गंभीर है।
- राजीव गौड़ा फरार हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई हो रही है।
- कांग्रेस पार्टी ने उन्हें निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू की है।
- महिलाओं के प्रति सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
बेंगलुरु, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस नेता राजीव गौड़ा द्वारा उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। यह मामला सिदलघट्टा कस्बे में एक बैनर हटाने को लेकर महिला नगर आयुक्त को कथित तौर पर फोन पर अभद्र भाषा एवं धमकी देने से जुड़ा है。
न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह आदेश पारित किया। आरोपी राजीव गौड़ा ने पिछला विधानसभा चुनाव सिदलघट्टा से लड़ा था और वर्तमान में वह फरार है।
इस बीच, अभियोजन पक्ष ने चिक्कबल्लापुर की द्वितीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय में गौड़ा की जमानत याचिका पर आपत्ति दर्ज कराई है। शनिवार को अदालत में अंतरिम जमानत के लिए याचिका दायर की गई थी।
गौरतलब है कि मंगलवार को भी कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस मामले में राजीव गौड़ा को कड़ी फटकार लगाई थी और सरकार से सवाल किया था कि उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला क्यों दर्ज नहीं किया गया।
एफआईआर रद्द करने की याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पूछा था कि महिला अधिकारी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के बावजूद आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 71 (महिलाओं और बच्चों के खिलाफ गंभीर यौन अपराध) और धारा 79 (किसी महिला की मर्यादा को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से शब्द, ध्वनि, इशारे या वस्तु का प्रयोग) क्यों नहीं लगाई गईं।
पीठ ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “क्या याचिकाकर्ता को महिलाओं के प्रति कोई सम्मान नहीं है? कोई व्यक्ति इस तरह की भाषा कैसे बोल सकता है? बोले गए शब्द वापस नहीं लिए जा सकते। एक बेलगाम जुबान सब कुछ तबाह कर सकती है।”
अदालत ने यह भी कहा कि केवल माफी मांग लेना उस मानसिकता को नहीं बदल सकता, जिसने यह आघात पहुंचाया है। इसके बाद अदालत ने मामले में आदेश सुरक्षित रख लिया था।
इस प्रकरण के बाद कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) ने बुधवार को राजीव गौड़ा को पार्टी से निलंबित करने की सिफारिश की। यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया और राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी के लिए भारी शर्मिंदगी का कारण बना।
केपीसीसी की ओर से जारी बयान में कहा गया, “इस मामले में राजीव गौड़ा के बयान मीडिया में व्यापक रूप से प्रसारित हुए हैं, जिससे पार्टी और उसके नेतृत्व को गंभीर असहजता हुई है। केपीसीसी अध्यक्ष ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए राजीव गौड़ा (सिदलघट्टा) को पार्टी से निलंबित करने का मामला अनुशासन समिति को सौंपने का निर्देश दिया है।”
बयान में आगे कहा गया कि निर्धारित प्रक्रिया और नियमों के अनुसार मामले की जांच कर तत्काल निलंबन की कार्रवाई की जाए।