केरल में बढ़ती गर्मी: 12 जिलों में मौसम संबंधी चेतावनी जारी
सारांश
Key Takeaways
- गर्मी का प्रकोप 12 जिलों में फैला हुआ है।
- पलक्कड़ में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच सकता है।
- लोगों को सुरक्षित रहने के लिए सावधानियाँ बरतने की सलाह दी गई है।
- स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के लिए जन जागरूकता जरूरी है।
- अधिकृत रिपोर्टों पर भरोसा करना महत्वपूर्ण है।
तिरुवनंतपुरम, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केरल में गर्मी का प्रकोप जारी है, जिसमें अधिकारियों ने इडुक्की और वायनाड के पहाड़ी क्षेत्रों को छोड़कर पूरे राज्य में तापमान संबंधी चेतावनी जारी की है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि गर्मी की स्थिति आगे भी बनी रह सकती है और निकट भविष्य में राहत की कोई उम्मीद नहीं है। पलक्कड़ सबसे गर्म जिला बना हुआ है, जहां पारा 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने की संभावना है। एक दिन पहले इस जिले में 39.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जो इस मौसम में राज्य का अब तक का सबसे अधिक तापमान है।
कोल्लम में भी भयंकर तापमान की आशंका है, जहाँ पूर्वानुमान के अनुसार तापमान 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच सकता है। पथानामथिट्टा, अलाप्पुझा, कोट्टायम, एर्नाकुलम, त्रिशूर, कोझिकोड, कन्नूर और कासरगोड जैसे कई अन्य जिलों में भी तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने की संभावना है।
तिरुवनंतपुरम और मलप्पुरम में तापमान 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुँच सकता है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने लू लगने और निर्जलीकरण के बढ़ते खतरे की चेतावनी दी है।
लोगों को सलाह दी गई है कि वे दोपहर के समय बाहरी गतिविधियों को सीमित करें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। अधिकारियों की प्रमुख सिफारिशों में हल्के, ढीले कपड़े पहनना और सीधे धूप में जाने से बचना शामिल है।
उच्च तापमान का असर दैनिक जीवन पर पड़ने लगा है, खासकर उन लोगों पर जो बाहरी कामों में लगे हैं। गर्मी का सूचकांक बढ़ने के साथ, बुजुर्गों, बच्चों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से ग्रस्त लोगों को ज्यादा खतरा है।
अधिकारियों ने स्थिति पर नजर रखी हुई है और जन जागरूकता और निवारक उपायों के महत्व को दोहराया है। केरल में गर्मी के इस दौर में स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने और जन कल्याण सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा सलाहों का पालन करना बेहद महत्वपूर्ण है।
इसी बीच, कुछ लोग बिना पुष्टि के तापमान संबंधी चेतावनियां साझा कर रहे हैं, जिसके चलते अधिकारियों को लोगों को केवल अधिकृत रिपोर्टों पर भरोसा करने की सलाह देनी पड़ी है। 9 अप्रैल को मतदान के बाद आने वाली छुट्टियों के चलते, कई परिवार गर्मी से बचने के लिए पहाड़ी जिलों की ओर रुख कर रहे हैं।