क्या मैं एक साधारण भक्त, शंकराचार्य पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं रखता? : कुमार विश्वास

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क्या मैं एक साधारण भक्त, शंकराचार्य पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं रखता? : कुमार विश्वास

सारांश

मुरादाबाद, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुए दुर्व्यवहार का मामला चर्चा में है। कुमार विश्वास ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने प्रशासन की संवेदनशीलता और शंकराचार्य की परंपरा का सम्मान किया है।

Key Takeaways

  • धर्म का सम्मान महत्वपूर्ण है।
  • प्रशासन को संवेदनशीलता
  • शंकराचार्य की परंपरा
  • सामाजिक सामंजस्य
  • कुमार विश्वास ने क्षमा

मुरादाबाद, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रयागराज में माघ मेले के दौरान संगम घाट पर ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुए दुर्व्यवहार का मामला बढ़ता जा रहा है। इस मुद्दे पर कुमार विश्वास ने अपनी प्रतिक्रिया दी।

कुमार विश्वास ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा कि इस मामले को दो पहलुओं से देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे एक साधारण भक्त और धर्म का सम्मान करने वाले व्यक्ति हैं, इसीलिए शंकराचार्य पर सीधी टिप्पणी करने का उन्हें अधिकार नहीं है।

उन्होंने कहा, "मैं एक साधारण भक्त और धर्म का सम्मान करने वाला व्यक्ति हूं, इसलिए शंकराचार्य पर सीधी टिप्पणी करने का मुझे अधिकार नहीं है, लेकिन फिर भी मैं दो बातें कहना चाहूंगा। पहली बात यह है कि प्रशासन को संवेदनशीलता से काम करना चाहिए था। भले ही कोई व्यक्ति संत प्रवृत्ति का हो, भगवा वस्त्र धारण किए हो और धर्म के लिए समर्पित हो, उनसे बात करते समय सम्मान और मर्यादा का ध्यान रखना आवश्यक है।"

दूसरी बात में कुमार विश्वास ने कहा, "मैं पूज्य शंकराचार्य से प्रार्थना करता हूं कि वे इस मामले में शांति बनाए रखें, गुस्से को त्याग दें, और सभी पर कृपा बरसाएं।"

उन्होंने शंकराचार्य की परंपरा की सराहना की और कहा कि इसी परंपरा के कारण धर्म, दर्शन और संस्कृति का मान बढ़ा है।

अंत में, उन्होंने सामान्य नागरिक के नाते कहा कि अगर कोई अपराध हुआ है तो वे पूज्य शंकराचार्य से क्षमा मांगते हैं। उनका मानना है कि शंकराचार्य सभी के मंगल के लिए आशीर्वाद दें।

बता दें कि हाल ही में माघ मेले के दौरान रथ और पूरे लाव-लश्कर के साथ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पवित्र नदी में स्नान करने पहुंचे थे, जहां पुलिस प्रशासन ने उन्हें बिना रथ के आगे बढ़ने को कहा। इस मुद्दे पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य तथा पुलिस प्रशासन के बीच झड़प हुई, जिसके बाद शंकराचार्य ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन ने सब कुछ जानबूझकर किया।

Point of View

हमें यह समझना चाहिए कि धर्म और आस्था के प्रतीकों का सम्मान करना आवश्यक है। कुमार विश्वास का दृष्टिकोण उनके धार्मिक विचारों को दर्शाता है, जबकि प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे संवेदनशीलता के साथ कार्य करें। यह मामला न केवल धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है, बल्कि समाज में सामंजस्य बनाए रखने का भी विषय है।
NationPress
04/02/2026

Frequently Asked Questions

कुमार विश्वास ने शंकराचार्य के मामले पर क्या कहा?
कुमार विश्वास ने कहा कि वे एक साधारण भक्त हैं और शंकराचार्य पर टिप्पणी करने का उन्हें अधिकार नहीं है। उन्होंने प्रशासन को संवेदनशीलता से काम करने की सलाह दी।
इस दुर्व्यवहार का कारण क्या था?
यह दुर्व्यवहार तब हुआ जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को बिना रथ के आगे बढ़ने के लिए कहा गया, जिसके बाद झड़प हुई।
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