क्या असम में मिया मुस्लिम समुदाय को निशाना बना रही है सरकार? : रकीबुद्दीन अहमद

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क्या असम में मिया मुस्लिम समुदाय को निशाना बना रही है सरकार? : रकीबुद्दीन अहमद

सारांश

क्या असम में भाजपा मिया मुस्लिम समुदाय को निशाना बना रही है? कांग्रेस विधायक रकीबुद्दीन अहमद ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों को खतरे में डालने वाली गतिविधियों पर चिंता जताई है। जानें इस मुद्दे पर उनका क्या कहना है।

मुख्य बातें

भाजपा पर मिया मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने का आरोप।
मतदाता सूचियों में अनियमितताओं पर गंभीर चिंता।
भाषा को राष्ट्रीयता से जोड़ने की प्रवृत्ति की आलोचना।
सामाजिक सद्भाव के लिए खतरा।
कांग्रेस ने निष्पक्ष जांच की मांग की।

गुवाहाटी, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस विधायक रकीबुद्दीन अहमद ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल मिया मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाकर असम में विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा दे रहा है।

उन्होंने बोको-चायगांव सह-जिला आयुक्त कार्यालय में मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक करार दिया।

मीडिया से बातचीत में उन्होंने उस राजनीतिक बयानबाजी की आलोचना की, जिसे उन्होंने मिया मुस्लिम समुदाय को अलग-थलग करने के लिए चलाए जा रहे एक सुनियोजित अभियान के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि असम में विभिन्न जातीय, धार्मिक और भाषाई समुदायों के बीच शांतिपूर्ण सहअस्तित्व की एक लंबी परंपरा रही है और किसी एक समुदाय को निशाना बनाना राज्य के सामाजिक सद्भाव को गंभीर रूप से कमजोर कर सकता है।

कांग्रेस विधायक ने भाषा को राष्ट्रीयता से जोड़ने की प्रवृत्ति पर भी विरोध जताया और बंगाली भाषी लोगों को बांग्लादेशी बताने वाले दावों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और असम के कई हिस्सों, जिनमें होजई भी शामिल है, में बंगाली भाषा बोली जाती है और केवल भाषा के आधार पर किसी व्यक्ति को बाहरी या विदेशी कहना न तो उचित है और न ही संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप।

अहमद ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनावी लाभ के लिए जानबूझकर जाति, धर्म और समुदाय के आधार पर समाज को बांटने की राजनीति कर रही है, जबकि कांग्रेस ने कभी भी इस तरह की रणनीति नहीं अपनाई। उन्होंने कहा कि बहिष्कार और संदेह पर आधारित राजनीति लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ-साथ सामाजिक एकता को भी नुकसान पहुंचाती है।

उन्होंने 22 जनवरी की रात को बोको-चायगांव सह-जिला आयुक्त कार्यालय में हुई एक घटना का उल्लेख करते हुए दावा किया कि कुछ नेता मतदाता सूचियों में नाम जोड़ने और हटाने में शामिल थे। अहमद ने इसे लोकतांत्रिक मानदंडों का गंभीर उल्लंघन बताया और कहा कि यह चुनावी निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न उठाता है।

कांग्रेस विधायक ने इस मामले को व्यापक संदर्भ में रखते हुए कहा कि यह घटना वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा पहले लगाए गए वोटों में हेरफेर के आरोपों की पुष्टि करती है। उनके अनुसार, इस तरह की घटनाएं चुनावी प्रक्रिया में जनता के विश्वास को कमजोर कर सकती हैं, जो किसी भी लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है।

अहमद ने कहा कि कांग्रेस ने इस पूरे मामले की व्यापक और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए भारतीय चुनाव आयोग से संपर्क किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी और चुनावों को अनुचित या अवैध तरीकों से प्रभावित करने के किसी भी प्रयास के खिलाफ चुप नहीं बैठेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें हमेशा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी समुदायों के अधिकारों और हितों की रक्षा हो। असम में मिया मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाना न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है, बल्कि यह सामाजिक एकता को भी प्रभावित कर सकता है। हमें इस मुद्दे पर गहराई से विचार करने की आवश्यकता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या असम में मिया मुस्लिम समुदाय पर कोई विशेष हमले हो रहे हैं?
कांग्रेस विधायक रकीबुद्दीन अहमद का कहना है कि भाजपा मिया मुस्लिम समुदाय को निशाना बना रही है।
क्या इस मुद्दे पर कांग्रेस ने कोई कार्रवाई की है?
हां, कांग्रेस ने इस मामले की जांच की मांग करते हुए भारतीय चुनाव आयोग से संपर्क किया है।
राष्ट्र प्रेस