क्या लड़ाई में सिर्फ मजबूत होना ही काफी है, या तकनीक अपनाने से ही आगे बढ़ा जा सकता है? : राजनाथ सिंह
Key Takeaways
- तकनीकी प्रगति के बिना युद्ध में सफलता मुश्किल है।
- समय पर निर्णय लेना आवश्यक है।
- रिसर्च और विकास में जोखिम लेना जरूरी है।
- उद्योगों और डीआरडीओ के बीच समन्वय बढ़ाना चाहिए।
- भारतीय इनोवेशन वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी है।
नई दिल्ली, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान समय में, विशेषकर युद्ध के क्षेत्र में, सिर्फ मजबूत होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि तेज होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जो राष्ट्र तेजी से सोचते हैं, तेजी से निर्णय लेते हैं, और तेजी से तकनीक का उपयोग करते हैं, वही आगे बढ़ते हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को यह बात कही। वह नई दिल्ली में डीआरडीओ के वैज्ञानिकों के समक्ष संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि रिसर्च से लेकर प्रोटोटाइप, टेस्टिंग से लेकर डिप्लॉयमेंट तक के बीच का समय कम करना आवश्यक है। उन्होंने उल्लेख किया कि सशस्त्र बलों में समय पर उपकरणों को सेवा में शामिल करना हमारी प्रदर्शन क्षमता का सबसे बड़ा मापदंड होना चाहिए। यही आज की असली चुनौती है।
यह वैज्ञानिक वे हैं जिन्होंने रक्षा क्षेत्र में अद्वितीय रिसर्च की है। रक्षा मंत्री ने भविष्य की रक्षा आवश्यकताओं पर संवाद किया। इन वैज्ञानिकों को गणतंत्र दिवस परेड में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। उन्होंने कहा कि आप सभी ने विभिन्न परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की है। आपकी प्रौद्योगिकी की परीक्षा तो युद्ध के मैदान में भी हो चुकी है। हाल ही में, ऑपरेशन सिंदूर इसका स्पष्ट प्रमाण है। ऑपरेशन सिंदूर ने यह सिद्ध कर दिया कि हमारे स्वदेशी सिस्टम, भारत की ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूत कर रहे हैं। यह सब डीआरडीओ के वैज्ञानिकों, इंजीनियर्स और तकनीकी टीम के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि उत्पादन और उद्योगों के बीच समन्वय की मजबूती भी हमारा फोकस होना चाहिए। डीआरडीओ आमतौर पर डिजाइन और प्रोटोटाइप पर ध्यान केंद्रित करता है, लेकिन उत्पादन करना उद्योगों का कार्य है, इसलिए इस गैप को कम करना अनिवार्य है। अंतर्राष्ट्रीय मॉडल की तरह, हमारे यहां भी को-डेवलपमेंट दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है, जहां डिज़ाइन से उत्पादन तक, उद्योग प्रारंभिक स्तर से ही जुड़े हों।
रक्षा मंत्री ने देश के इन प्रसिद्ध वैज्ञानिकों से कहा कि आपकी जिम्मेदारियां बहुत अधिक हैं, इसलिए आपको रिसर्च के क्षेत्र में जोखिम लेने का साहस करना चाहिए। आपको उन क्षेत्रों से आगे बढ़ना चाहिए जहां निजी क्षेत्र ने पहले ही अपनी विश्वसनीयता स्थापित कर ली है। उन्होंने कहा कि यह डीआरडीओ और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के बीच ज्ञान साझा करने का प्रमाण है कि लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस हमारे लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि ऐसी अनेक उपलब्धियां हमारे सामने हैं। इसके लिए आवश्यक है कि आप शिक्षा जगत के साथ मिलकर, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के साथ, ज्ञान साझा करें। रक्षा मंत्री ने कहा कि दशकों तक हमारी रक्षा आवश्यकताएं विदेशी तकनीक पर निर्भर रहीं। उस समय परिस्थितियाँ और विकल्प सीमित थे, लेकिन अब भारत एक नए युग में खड़ा है। आज हमारी सोच में बदलाव आया है, हमारा आत्मविश्वास बढ़ा है और हमारी दिशा स्पष्ट है।
उन्होंने कहा कि इस परिवर्तन में डीआरडीओ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। रक्षा क्षेत्र से संबंधित शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो, जहां डीआरडीओ की उपस्थिति न हो। आपने यह साबित किया है कि भारतीय इनवोवेशन किसी भी मामले में वैश्विक स्तर पर पीछे नहीं है, बल्कि कई क्षेत्रों में उनसे आगे है। रक्षा मंत्री ने कहा कि 2047 तक, जिस विकसित राष्ट्र के निर्माण का लक्ष्य हमने रखा है, उसमें आपका योगदान महत्वपूर्ण होगा। आप सभी के प्रयासों से, भारत न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से, बल्कि सोच और आत्मबल के स्तर पर भी, और अधिक सशक्त बनेगा।