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क्या मुसलमान राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति बन सकते हैं, तो मेयर क्यों नहीं?: वारिस पठान

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क्या मुसलमान राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति बन सकते हैं, तो मेयर क्यों नहीं?: वारिस पठान

सारांश

एआईएमआईएम के नेता वारिस पठान ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के महापौर पर बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने संविधान की बातें की और सवाल उठाया कि जब राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति मुसलमान बन सकते हैं, तो महापौर क्यों नहीं?

मुख्य बातें

संविधान की शपथ लेने के बावजूद असंवैधानिक बातें करना सही नहीं है।
महापौर के चयन में धर्म और भाषा का कोई संबंध नहीं होना चाहिए।
दिल्ली दंगों में मुसलमानों को अधिकतर जेल में रखा गया है।

मुंबई, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। एआईएमआईएम के नेता वारिस पठान ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के महापौर से संबंधित बयान पर कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जब देश का राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति मुसलमान हो सकते हैं, तो मुसलमान महापौर क्यों नहीं बन सकता?

मुंबई में वारिस पठान ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि संविधान की शपथ लेकर देवेंद्र फडणवीस सीएम बने हैं, लेकिन वे संविधान का पालन नहीं करते। संविधान में यह नहीं लिखा है कि महापौर केवल एक विशेष धर्म या भाषा का होना चाहिए। संविधान का मूल सिद्धांत एकता और बराबरी है। मुंबई का महापौर मुसलमान क्यों नहीं हो सकता? हिजाबमुस्लिम महिला महापौर क्यों नहीं बन सकती? मैंने तो भारत के मुसलमानों की बात की है। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति बन सकते हैं, तो मुसलमान महापौर क्यों नहीं बन सकता? मुख्यमंत्री असंवैधानिक बातें कर रहे हैं। आपके पास विकास का कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए आप ध्यान भटकाने के लिए ऐसी बातें कर रहे हैं। प्रदूषण से लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, आधे घंटे की बारिश में मुंबई ठप हो जाती है। ड्रेनेज सिस्टम पर क्या कार्य किया गया, यह बताइए।

वारिस पठान ने कहा कि लव जिहाद का अर्थ बताइए। क्या आप सदन में चर्चा नहीं करना चाहते? किन राज्यों में कितने मामले आए, इसका डेटा क्यों नहीं दिखाते? कानून के अनुसार यदि एक युवक-युवती शादी करते हैं, तो इसमें क्या समस्या है? भाजपा के नेताओं ने मुसलमानों से शादी की, क्या इसे लव जिहाद कहा जाएगा? बॉलीवुड में भी ऐसा हुआ, क्या वो लव जिहाद है?

उन्होंने ठाकरे बंधुओं के घोषणापत्र पर कहा कि मैंने घोषणापत्र नहीं देखा है। समय मिलेगा तो देखूंगा और फिर इस पर अपनी राय दूंगा। इतने वर्षों से सत्ता में थे, कौन सा काम किया? बीएमसी को बेहाल बना दिया है।

नेता वारिस पठान ने दिल्ली दंगों के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज करने पर कहा कि हम कानून का पालन करते हैं और सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं। पांच लोगों को जमानत मिली है, जबकि उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत खारिज कर दी गई है।

उन्होंने कहा कि एक साल तक जमानत नहीं मिलेगी, थोड़ी कठिनाई होगी। हम चाहते हैं कि इनका ट्रायल जल्द शुरू हो और ये लोग भी जल्दी बाहर आएं। उन्होंने कहा कि आंकड़े देखें तो मुसलमानों को अधिकतर जेल में रखा गया है, जिनकी कोई सुनवाई नहीं होती। कोर्ट को कानून बनाना चाहिए, जिससे बेल मिलनी चाहिए। केजरीवाल को भी बेल मिली थी, तो इन्हें भी अपने हक में बेल मिलनी चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संविधान की मूल भावना और समानता के सिद्धांत को भी चुनौती देता है। इस प्रकार के बयान राजनीतिक विमर्श में विविधता और समावेशिता की आवश्यकता को उजागर करते हैं।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वारिस पठान ने क्या कहा?
उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के महापौर से संबंधित बयान पर प्रतिक्रिया दी और पूछा कि जब राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति मुसलमान बन सकते हैं, तो महापौर क्यों नहीं बन सकता?
क्या वारिस पठान का बयान असंवैधानिक है?
वारिस पठान का कहना है कि संविधान में महापौर के लिए किसी विशेष धर्म या भाषा की शर्त नहीं है, इसलिए उनका बयान असंवैधानिक नहीं है।
दिल्ली दंगों के मामले में वारिस पठान ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि वे कानून का पालन करते हैं और सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं, लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत खारिज होने पर चिंता व्यक्त की।
राष्ट्र प्रेस
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