क्या एनसीपी (शरद पवार गुट) से गठबंधन का उद्देश्य वोटों का बंटवारा रोकना था?
सारांश
Key Takeaways
- अजित पवार ने एनसीपी (शरद पवार गुट) के साथ गठबंधन की व्यावहारिकता पर जोर दिया।
- उनका उद्देश्य वोटों का बंटवारा रोकना था।
- वर्तमान चुनावों पर उनका ध्यान केंद्रित है।
- शरद पवार के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है।
- परिवार के रिश्ते पर उनका सकारात्मक दृष्टिकोण।
मुंबई, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने एनसीपी (शरद पवार गुट) के साथ गठबंधन, भविष्य की राजनीति और चल रही अटकलों पर अपने विचार व्यक्त किए हैं।
राष्ट्र प्रेस से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह गठबंधन पूरी तरह से व्यावहारिक दृष्टिकोण के तहत किया गया है और इसका मुख्य उद्देश्य वोटों के बंटवारे को रोकना है।
एनसीपी (शरद पवार गुट) के साथ गठबंधन पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में अजित पवार ने कहा, "इसमें गलत क्या है? हमारा उद्देश्य वोटों का विभाजन रोकना था, इसलिए हमने गठबंधन किया। स्थानीय स्तर पर हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं की भी यही भावना थी कि यदि गठबंधन किया जाए तो बेहतर परिणाम आ सकते हैं।"
भविष्य में एनसीपी (शरद पवार गुट) के साथ गठबंधन को लेकर पूछे गए प्रश्न पर अजित पवार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उनका ध्यान मौजूदा चुनावों पर है। उन्होंने कहा, "इस समय हमारी प्राथमिकता केवल वर्तमान चुनाव हैं। इन चुनावों में सकारात्मक परिणाम लाने के लिए हम पूरी ताकत लगा रहे हैं। यही अभी हमारा सबसे बड़ा लक्ष्य है।"
एनसीपी (शरद पवार गुट) और एनसीपी (अजित पवार) के विलय के बारे में चल रही अटकलों पर भी उपमुख्यमंत्री ने विराम लगाया। उन्होंने कहा, "हमने इस बारे में अभी कोई विचार नहीं किया है। पहले चुनाव हैं, फिर देखा जाएगा।"
जब उनसे शरद पवार और सुप्रिया सुले से बातचीत को लेकर सवाल किया गया, तो अजित पवार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी उनसे कोई बातचीत नहीं हुई है।
परिवार और आपसी संबंधों पर बोलते हुए अजित पवार ने कहा कि वे सभी एक ही परिवार का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा, "हम एक परिवार हैं। साथ बैठते हैं, साथ उठते हैं, खुशी और दुख में एक-दूसरे के साथ रहते हैं। क्या हर परिवार में ऐसा नहीं होता? यदि परिवार सुख-दुख में साथ खड़ा रहता है, तो इसमें गलत क्या है?"
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के संभावित गठबंधन पर प्रतिक्रिया देते हुए अजित पवार ने कहा कि दोनों दलों की कोशिशें चल रही हैं। अब तक दोनों अलग-अलग चुनाव लड़ते थे और उनके वोटर भी अलग थे। यदि वे साथ आते हैं तो वोटों का बंटवारा नहीं होगा, जिससे उन्हें फायदा होगा। यह बात सही है।