क्या पीएम मोदी के नेतृत्व में ट्रेड वार्ताओं से हम एक नया ट्रेंड सेट करेंगे? : शायना एनसी

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क्या पीएम मोदी के नेतृत्व में ट्रेड वार्ताओं से हम एक नया ट्रेंड सेट करेंगे? : शायना एनसी

सारांश

क्या पीएम मोदी के नेतृत्व में ट्रेड वार्ताओं से भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक नया ट्रेंड सेट होगा? शायना एनसी ने इस बारे में अपनी महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ साझा की हैं, जो सभी के लिए रुचिकर हैं। जानें, उनके विचार और नए नियमों के प्रभाव के बारे में।

Key Takeaways

  • भारत और यूरोपीय संघ में व्यापार वार्ता का महत्व
  • मेक इन इंडिया की वैश्विक स्वीकृति
  • यूजीसी के नए नियमों की आवश्यकता
  • जाति आधारित भेदभाव का अंत
  • 24 घंटे हेल्पलाइन का महत्व

मुंबई, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। शिवसेना की नेता शायना एनसी ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर अपनी खुशी व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ का व्यापार वार्ता में शामिल होना एक अत्यंत स्वागत योग्य निर्णय है।

राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत में, शिवसेना नेता शायना एनसी ने कहा कि जब बात भारत की आती है, तो हम यह साबित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं कि 'मेक इन इंडिया' एक ऐसी पहल है, जो विश्वस्तर पर मान्यता प्राप्त होगी। हमें केवल संयुक्त राज्य अमेरिका पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। यूरोपीय संघ एक विशाल बाजार है और भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं भी प्रबल हैं। मुझे विश्वास है कि आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ट्रेड वार्ताओं से हम एक नया ट्रेंड सेट करेंगे।

यूजीसी के नए नियमों पर शायना एनसी ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि लोग यूजीसी का विरोध क्यों कर रहे हैं। नए नियमों के अनुसार, यह अनिवार्य किया गया है कि सभी संस्थानों को शिकायतों का निपटारा करना होगा और सभी को साथ लेकर चलने की प्रोत्साहना करनी होगी। इक्विटी कमेटियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी, महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों के प्रतिनिधि शामिल हैं। ये नियम सभी के लिए निष्पक्षता और समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं और इनमें कुछ भी विवादास्पद नहीं है।

शायना एनसी ने 24 घंटे उपलब्ध रहने वाले हेल्पलाइन सिस्टम का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी पीड़ितों को इस हेल्पलाइन के माध्यम से सहायता मिलेगी। जो लोग किसी भी प्रकार की गैरकानूनी फंडिंग लेते हैं, उनके लिए सजा का प्रावधान है। इसलिए मुझे लगता है कि सरकार अपने वादों को निभा रही है। शिक्षा के क्षेत्र में सभी को साथ लेकर चलने की भावना होनी चाहिए, लेकिन भेदभाव नहीं होना चाहिए।

जाति आधारित भेदभाव पर शायना एनसी ने कहा कि जाति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है। भारतीय विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में समानता है। यदि कोई गड़बड़ी होती है, तो उसे रोकने के लिए उचित व्यवस्था की गई है। इसलिए जो लोग कहते हैं कि यूजीसी लोगों की सेवा नहीं कर रहा है, मेरा मानना है कि वह बहुत अच्छा काम कर रहा है।

Point of View

यह महत्वपूर्ण है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार वार्ता का यह नया अध्याय भारत की आर्थिक स्थिरता और विकास के लिए एक सकारात्मक कदम है। शायना एनसी की टिप्पणियां इस दिशा में एक नई सोच का संकेत देती हैं।
NationPress
04/02/2026

Frequently Asked Questions

भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का क्या महत्व है?
यह एग्रीमेंट भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को बढ़ाने और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने में मदद करेगा।
यूजीसी के नए नियमों का उद्देश्य क्या है?
नए नियमों का उद्देश्य सभी संस्थानों में निष्पक्षता और समान अवसर सुनिश्चित करना है।
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