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क्या शासन ही असली लोकतंत्र है? राजनाथ सिंह

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क्या शासन ही असली लोकतंत्र है? राजनाथ सिंह

सारांश

क्या शासन ही असली लोकतंत्र है? जानिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के विचारों को, जिन्होंने कहा है कि लोकतंत्र का असली मतलब जनता के लिए शासन होना चाहिए। यह लेख आपको बताएगा कि कैसे सरकार के कदम आम नागरिकों की ज़िंदगी को प्रभावित कर रहे हैं।

मुख्य बातें

शासन का उद्देश्य आम नागरिकों की भलाई होना चाहिए।
लोकतंत्र की सफलता का माप उसके अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने से होता है।
सरकार के कदमों से करोड़ों लोग गरीबी से बाहर आए हैं।
स्वच्छ भारत मिशन सामाजिक आंदोलन बन गया है।
महिलाओं को 33% आरक्षण से लोकतंत्र मजबूत होगा।

नई दिल्ली, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारतीय गणराज्य की असली ताकत इस बात में है कि शासन आम नागरिकों के हित में कार्य करे। 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक लेख में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि लोकतंत्र केवल संविधान और चुनावों तक सीमित नहीं है, बल्कि तब सफल होता है जब इसका लाभ देश के सबसे अंतिम व्यक्ति तक पहुँचता है।

राजनाथ सिंह ने भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के 1952 के भाषण को याद करते हुए कहा कि आज़ादी और संविधान मिलना मंजिल नहीं, बल्कि एक लंबी यात्रा की शुरुआत थी। उनका कहना था कि देश का असली उद्देश्य लोगों की कठिनाइयों को कम करना और उनके जीवन में सुख-शांति लाना है। उन्होंने बताया कि लोकतंत्र का मतलब केवल ‘जनता का’ और ‘जनता द्वारा’ शासन नहीं, बल्कि सबसे महत्वपूर्ण है ‘जनता के लिए’ शासन। इसका अर्थ है कि सरकार के सभी निर्णय आम नागरिकों के भले के लिए होने चाहिए, विशेष रूप से गरीबों, वंचितों और कमजोर वर्गों के लिए।

रक्षा मंत्री ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र की असली परीक्षा यह है कि वह अपने सबसे कमजोर नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है। केवल नियम-कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, यह आवश्यक है कि सरकार जमीन पर लोगों की आवश्यकताओं को कितनी अच्छी तरह पूरा कर पाती है। उन्होंने भारतीय परंपरा का उल्लेख करते हुए योग-क्षेम, गांधी जी के सर्वोदय और दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद को जन-केंद्रित सोच का आधार बताया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 'सबका साथ, सबका विकास' इसी सोच का आज का रूप है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने नीतियों को सीधे आम आदमी के जीवन से जोड़ा है। श्रम कानूनों में सुधार, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण, और सामाजिक न्याय पर जोर इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। उन्होंने विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले एक दशक में 17 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर आए हैं। दिव्यांगों और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े कानूनों को भी उन्होंने सम्मान और समानता की दिशा में बड़ा कदम बताया।

रक्षा मंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन पर बात करते हुए कहा कि यह केवल सफाई अभियान नहीं रहा, बल्कि लोगों की भागीदारी से जुड़ा एक जन-आंदोलन बन गया है, जिसने स्वास्थ्य, सम्मान और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को सामने रखा। उन्होंने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, जीवन ज्योति बीमा योजना, आयुष्मान भारत, जनधन योजना, मुद्रा योजना और कौशल भारत मिशन का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं ने करोड़ों लोगों को सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सम्मान प्रदान किया है।

उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलने से लोकतंत्र और मजबूत होगा और महिलाओं की आवाज नीति-निर्माण में और अधिक प्रभावी बनेगी। अंत में राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय गणराज्य कोई एक बार पूरा होने वाला कार्य नहीं है। यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें हर पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह लोकतंत्र को जमीनी हकीकत से जोड़े। आज देश में शासन के केंद्र में आम नागरिक हैं और भारत सामाजिक न्याय और आर्थिक समावेशन के मार्ग पर लगातार आगे बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि राजनाथ सिंह का बयान लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती का संकेत है। यह जरूरी है कि शासन आम नागरिकों के हित में कार्य करे और हर पीढ़ी को अपने कर्तव्यों को निभाना चाहिए।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजनाथ सिंह ने लोकतंत्र के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव और संविधान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तब सफल होता है जब इसका लाभ आम नागरिकों तक पहुँचता है।
क्या शासन का मतलब सिर्फ कानून बनाना है?
नहीं, शासन का मतलब है कि सरकार को नागरिकों की जरूरतों को समझकर उनके हित में काम करना चाहिए।
स्वच्छ भारत मिशन का क्या महत्व है?
यह केवल सफाई अभियान नहीं है, बल्कि यह लोगों की भागीदारी से जुड़ा एक जन-आंदोलन है।
राष्ट्र प्रेस
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