क्या 'वंदे मातरम' ने सिनेमा में 150 साल पूरे किए?
सारांश
Key Takeaways
- वंदे मातरम का 150 साल का सफर
- क्लासिकल से मॉडर्न तक का विकास
- स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक
- भारतीय सिनेमा में निरंतरता
मुंबई, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वंदे मातरम न केवल एक राष्ट्रीय गीत है, बल्कि यह स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक भी है। भारतीय सिनेमा में इस गीत ने हमेशा देशभक्ति की भावना को जगाया है। जब भी यह गीत स्क्रीन पर गूंजा, जोश, ऊर्जा और राष्ट्रप्रेम की लहर फैल गई।
'वंदे मातरम' ने क्लासिकल से मॉडर्न तक का सफर तय किया है। लता मंगेशकर से लेकर विशाल-शेखर तक कई प्रसिद्ध गायकों ने इसे गाया है। सिनेमा में यह बलिदान और एकता का प्रतीक बन गया है।
यह गीत पहली बार 1952 की फिल्म 'आनंद मठ' में सुनाई दिया। हेमंत कुमार द्वारा संगीतबद्ध इस गीत को लता मंगेशकर ने गाया, और यह आज भी प्रसिद्ध है। फिल्म में यह स्वतंत्रता संग्राम की भावना को दर्शाता है।
साल 1997 में एआर रहमान ने 'वंदे मातरम' (मां तुझे सलाम) नाम से एक स्वतंत्र एल्बम जारी किया। यह एक आधुनिक फ्यूजन और रॉक का समावेश था।
वर्ष 2001 की फिल्म 'कभी खुशी कभी गम' में उषा उत्थुप और कविता कृष्णमूर्ति ने इस गीत को गाया, और यह परिवार और देशभक्ति को दर्शाता है।
फिल्म 'एबीसीडी 2' (2015) में सचिन-जिगर ने गीत को नए अंदाज में प्रस्तुत किया। यह डांस फिल्म थी और गीत में एनर्जेटिक बीट्स शामिल थे।
इसके अलावा, कोड नेम: तिरंगा (2022) और 'ऑपरेशन वेलेंटाइन' (2024) जैसी फिल्मों में भी वंदे मातरम का नया संस्करण पेश किया गया है।
इस गीत की रचना बंकिमचंद्र चटर्जी ने की थी और यह पहली बार 7 नवंबर 1875 को बंगदर्शन में प्रकाशित हुआ। यह मातृभूमि को देवी के रूप में पूजने का संदेश देता है। 2025 में वंदे मातरम के 150 साल पूरे होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर 7 नवंबर 2025 को एक भव्य समारोह की शुरुआत की।