क्या वारिस पठान के बयान पर शायना एनसी का यह पलटवार सही है?
सारांश
Key Takeaways
- राष्ट्रवाद की भावना को बढ़ावा देने वाले नेता महत्वपूर्ण हैं।
- तुष्टिकरण की राजनीति अब समाप्त हो रही है।
- राजनीतिक प्रदर्शन का महत्व बढ़ा है।
- दावोस में निवेश का अवसर है।
- जनता का विश्वास नेताओं के लिए आवश्यक है।
मुंबई, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। एआईएमआईएम के नेता वारिस पठान द्वारा महाराष्ट्र और देश को हरे रंग में बदलने की बात पर शिवसेना नेता शायना एनसी ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनके दादा-परदादा भी इस देश को हरा नहीं कर पाए।
राष्ट्र प्रेस से बातचीत में शायना एनसी ने कहा कि एआईएमआईएम केवल इस्लामीकरण की ओर अग्रसर है। हरे रंग की बात करना। वे भूल गए कि उनके दादा-परदादा इस देश को हरा नहीं कर पाए। औरंगजेब, अकबर, बाबर, और हुमायूँ भी सफल नहीं हुए। यह महाराष्ट्र है, छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि, जहाँ हिंदवी स्वराज की स्थापना हुई। आप मत भूलिए कि भगवा हमारा अस्तित्व और गर्व है। आप तुष्टिकरण की राजनीति करते रहिए और समझ लीजिए कि जनता आपको नकारेगी। क्योंकि वो दिन गए जब जात-पात-धर्म की राजनीति होती थी। आज पॉलिटिक्स ऑफ परफॉर्मेंस का युग है।
शायना एनसी ने भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण मिलने पर कहा कि उनका ट्रैक रिकॉर्ड देखिए। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक थे, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, केंद्र में मंत्री थे और फिर महाराष्ट्र के गवर्नर बने। उन्होंने केवल राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया है। यदि उन्हें अवॉर्ड मिलने पर आपत्ति है, तो शायद इसीलिए कि उनके पक्ष के नेताओं में ऐसा कोई ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है। यह निर्णय राष्ट्रहित में है, और भगत सिंह कोश्यारी को मिल रहा सम्मान गर्व का पल है।
शायना एनसी ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के खिलाफ गणेश नाइक के बयान पर कहा कि क्या गणेश नाइक ने ऐसे बयान देने से पहले भाजपा की लीडरशिप से अनुमति ली है या यह उनकी व्यक्तिगत राय है? हमें उनके सर्टिफिकेट की कोई आवश्यकता नहीं है। एकनाथ शिंदे एक मास लीडर हैं, जिन पर जनता का विश्वास है। जब आप इस तरह के बयान देते हैं, तो आपकी मानसिकता साफ दिखाई देती है। गणेश नाइक, आपको मंत्री पद का मौका तब मिला था, जब इस महाराष्ट्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे थे।
दावोस का जिक्र करते हुए शायना एनसी ने कहा कि दावोस में 3,00,000 करोड़ रुपए के एमओयू साइन हुए हैं, जिससे महाराष्ट्र में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट आएगा। यह अपने आप में ऐतिहासिक है। विपक्ष को आपत्ति इसलिए हो रही है, क्योंकि उन्हें पता है कि महाराष्ट्र सबसे आगे है। कन्वर्जन रेट के अनुसार 55 से 65 प्रतिशत एमओयू वास्तव में लागू होंगे। इससे रोजगार के अवसर पैदा होंगे, मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा। आपको यह देखना चाहिए कि अर्थव्यवस्था किस तरह एक विकसित भारत और एक विकसित महाराष्ट्र की ओर बढ़ रही है।