क्यों केंद्रीय बजट से पहले शेयर बाजार में दबाव होता है?
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 25 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय बजट 2026-27 का प्रस्तुति दिन नजदीक आ रहा है, और इस अवधि में शेयर बाजार में अक्सर अनिश्चितता का माहौल रहता है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि बजट की तारीख करीब आते ही बाजार में गिरावट देखने को मिलती है। इसका मुख्य कारण सरकारी नीतियों में अचानक बदलाव का डर है। हालांकि, बजट के बाद बाजार में रिकवरी भी देखने को मिलती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बजट के बाद पहले हफ्ते में शेयर बाजार औसतन 1.36 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है।
बजट से पहले बाजार की कमजोरी का एक अन्य कारण उतार-चढ़ाव भी है। आंकड़ों के अनुसार, बजट वाले दिन बाजार में औसतन 2.65 प्रतिशत का इंट्राडे उतार-चढ़ाव होता है।
पिछले 15 वर्षों में देखा गया है कि बजट से एक हफ्ते पहले निफ्टी का औसत रिटर्न 0.52 प्रतिशत नकारात्मक रहा है। इस दौरान निफ्टी केवल 8 बार ही बढ़त के साथ बंद हुआ।
हाल के वर्षों में भी यह ट्रेंड देखने को मिला है। पिछले पांच वर्षों में चार साल बजट से पहले वाले महीने में निफ्टी में गिरावट आई है, जिसमें जनवरी 2025 की गिरावट भी शामिल है।
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के प्रमुख, राहुल शर्मा ने कहा कि यूनियन बजट 2026 में उम्मीद है कि सरकार वित्तीय संतुलन बनाए रखते हुए आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी। इसके साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों जैसे वैश्विक दबावों का भी ध्यान रखा जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस और रेलवे में पूंजीगत खर्च बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा, ताकि देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से सुरक्षित रखा जा सके। डिफेंस बजट बढ़ने की उम्मीद भी जताई जा रही है।
उद्योग संगठनों की मांग है कि एमएसएमई, मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए तेज जीएसटी रिफंड और लॉजिस्टिक्स में निवेश जैसे कदम उठाए जाएं।
एक्सपर्ट ने बताया कि वित्तीय घाटा (फिस्कल डेफिसिट) जीडीपी का 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। साथ ही, रोजगार सृजन, ग्रामीण मांग और टिकाऊ विकास पर जोर देकर भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि, कुछ जोखिम भी बने हुए हैं। बजट वाले दिन बाजार में तेज उतार-चढ़ाव रह सकता है। यदि बजट में अपेक्षित राहत नहीं मिली या वित्तीय लक्ष्य बिगड़ गए, तो बेचने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है, जिससे ब्याज दरें बढ़ने और बाजार में पैसे की कमी हो सकती है।
इसके अलावा, भू-राजनीतिक तनाव, रुपए में उतार-चढ़ाव और वैश्विक व्यापार में रुकावट भी बाजार पर असर डाल सकती है। देश के अंदर नीतियों को लागू करने में देरी निवेशकों के विश्वास को कमजोर कर सकती है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि शेयर बाजार की ऊंची वैल्यूएशन, एफआईआई की बिकवाली और एआई बबल का फटना कुछ ऐसी बाधाएं हैं जो इस साल निफ्टी की 29,000 के स्तर की रैली को पटरी से उतार सकती हैं।
एक्सपर्ट ने निवेशकों को सलाह दी है कि बजट के बाद स्थिति स्पष्ट होने तक कुछ नकद राशि सुरक्षित रखें और डिफेंस व सरकारी बैंकों (पीएसयू बैंक) जैसे चुनिंदा क्षेत्रों पर ध्यान दें।
केयरएज रेटिंग्स का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 में फिस्कल डेफिसिट जीडीपी का 4.4 प्रतिशत रहेगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2027 में फिस्कल डेफिसिट 4.2 से 4.3 प्रतिशत के बीच रह सकता है। इस दौरान सरकार का कुल उधार 16–17 लाख करोड़ रुपए और शुद्ध उधार 11.5-12 लाख करोड़ रुपए रहने की संभावना है।