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एलपीजी के लिए बड़ी उपलब्धि! भारतीय जहाज ग्रीन आशा ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार किया

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एलपीजी के लिए बड़ी उपलब्धि! भारतीय जहाज ग्रीन आशा ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार किया

सारांश

भारत के लिए एक नई सफलता, जहाज ग्रीन आशा ने ईरान के निकट स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार किया है। यह कदम देश की एलपीजी आपूर्ति को मजबूती देता है, जबकि खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है।

मुख्य बातें

ग्रीन आशा ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार किया, जो एक बड़ी उपलब्धि है।
यह घटना भारतीय एलपीजी आपूर्ति की सुरक्षा में मदद करती है।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बावजूद, भारतीय जहाजों की गतिविधि मजबूत है।
इस मार्ग से गुजरने वाले अन्य भारतीय जहाजों में बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम शामिल हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक पेट्रोलियम व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है।

नई दिल्ली, 5 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। एलपीजी के क्षेत्र में देश के लिए एक महत्वपूर्ण खुशखबरी आई है। भारतीय ध्वज वाला जहाज ग्रीन आशा ने ईरान के निकट स्थित संकरे समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सफलतापूर्वक पार कर लिया है।

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच, यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलने वाला भारत का नौवां जहाज है।

ईरान ने अमेरिका और इजरायल के बीच शुरू हुए युद्ध के बाद इस रास्ते को बंद कर दिया है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया में होने वाले पेट्रोलियम व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है।

रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीन आशा एक एलपीजी टैंकर है और जोखिमों के बावजूद इसका सफलतापूर्वक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करना, इस क्षेत्र में भारत की लगातार निर्भरता को दर्शाता है।

इस तनाव ने वैश्विक ईंधन आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है, जिससे दुनिया के ऊर्जा बाजार कठिन चुनौती का सामना कर रहे हैं। समुद्री आंकड़े बताते हैं कि इस मार्ग का उपयोग करने वाले लगभग 60 प्रतिशत मालवाहक जहाज या तो ईरान से आ रहे हैं या ईरान के लिए जा रहे हैं।

इन चुनौतियों के बावजूद, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारतीय जहाजों की गतिविधि अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है।

ग्रीन आशा की यात्रा से पहले, कम से कम आठ भारतीय जहाज इस मार्ग से गुजर चुके थे।

इनमें एलपीजी वाहक बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम शामिल हैं, जिन्होंने संघर्ष क्षेत्र से लगभग 94,000 टन माल का परिवहन किया।

मार्च के अंत में, पाइन गैस और जग वसंत सहित चार भारतीय ध्वज वाले एलपीजी टैंकरों ने तीन दिनों के भीतर 92,600 टन से अधिक एलपीजी की आपूर्ति की।

इससे पहले, एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी ने मार्च के मध्य में गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाहों तक लगभग 92,700 टन एलपीजी पहुंचाई थी।

अन्य शिपमेंट में कच्चा और ईंधन शामिल थे। तेल टैंकर जग लाडकी ने संयुक्त अरब अमीरात से मुंद्रा तक 80,000 टन से अधिक कच्चे तेल का परिवहन किया, जबकि जग प्रकाश ने ओमान से अफ्रीकी बाजारों के लिए गैसोलीन ले जाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार किया।

एक अन्य एलपीजी वाहक, ग्रीन सानवी ने भी हाल ही में लगभग 46,650 मीट्रिक टन कार्गो के साथ अपनी यात्रा पूरी की।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो देश की ऊर्जा सुरक्षा को दर्शाती है। तनावपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद, भारतीय जहाजों की आवाजाही ने यह साबित किया है कि भारत इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बनाए रख सकता है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति क्या है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है, जो विश्व के पेट्रोलियम व्यापार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
क्या ग्रीन आशा एक मात्र भारतीय जहाज है जो इस मार्ग से गुजरा है?
नहीं, ग्रीन आशा नौवां भारतीय जहाज है जिसने इस मार्ग को पार किया है।
इस तनाव का वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर क्या प्रभाव होगा?
इस तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है, जिससे ऊर्जा बाजार में चुनौतियाँ उत्पन्न हो रही हैं।
क्या भारत इस क्षेत्र में एलपीजी की आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है?
हाँ, भारतीय जहाजों की निरंतर गतिविधि इस क्षेत्र में भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता को दर्शाती है।
क्या ग्रीन आशा का पास होना सुरक्षित था?
हाँ, ग्रीन आशा ने सफलतापूर्वक इस मार्ग को पार किया, जो भारतीय नौवहन के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
राष्ट्र प्रेस
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