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क्या माडवी हिडमा के नारे लगाने वालों पर पुलिस को उचित कार्रवाई करनी चाहिए?

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क्या माडवी हिडमा के नारे लगाने वालों पर पुलिस को उचित कार्रवाई करनी चाहिए?

सारांश

हाल ही में माडवी हिडमा की मौत पर जेएनयू में वामपंथी संगठनों द्वारा नारेबाजी की गई। इससे अभाविप ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें देश की सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का जिक्र किया गया है। क्या पुलिस को इस पर उचित कार्रवाई करनी चाहिए?

मुख्य बातें

माडवी हिडमा की मौत के बाद वामपंथी संगठनों का समर्थन अभाविप का राष्ट्र विरोधी नारों के खिलाफ कड़ा विरोध दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन का राजनीतिकरण

नई दिल्ली, २४ नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। हाल ही में भारतीय सुरक्षा बलों ने देश के माओवादी कमांडर माडवी हिडमा को मार गिराने में सफलता प्राप्त की। इस उपलब्धि के बाद, अभाविप जेएनयू ने विश्वविद्यालय परिसर में एक शांतिपूर्ण विजय जुलूस निकाला, जिसमें बड़ी संख्या में छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और हमारे वीर जवानों के साहस, पराक्रम और बलिदान को सलाम किया।

यह जुलूस राष्ट्रीय सुरक्षा के सम्मान और आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का प्रतीक था। लेकिन यह देखना अत्यंत हैरान और दुखदायी है कि इसी जेएनयू के वामपंथी संगठनों ने हिडमा की मौत के विरोध में पर्चे बांटे और उसके प्रति खुला समर्थन दर्शाया। यह तत्व, जो वर्षों से नक्सल हिंसा को वैचारिक संरक्षण देने की कोशिश कर रहे हैं, एक बार फिर अपने असली चेहरे के साथ सामने आए।

दिल्ली में इंडिया गेट के निकट प्रदूषण के खिलाफ आयोजित एक प्रदर्शन में, जो कि एक पर्यावरणीय मुद्दा होना चाहिए था, वामपंथी मानसिकता से प्रेरित कुछ समूहों ने भड़काऊ और देशविरोधी नारे लगाए। यह न केवल शर्मनाक है, बल्कि आतंकवादियों के समर्थन की खतरनाक प्रवृत्ति का प्रतीक भी है।

हिडमा ने वर्षों तक देश के सैकड़ों निर्दोष वनवासियों, सुरक्षा बलों और ग्रामीणों की मृत्यु का कारण बना। वह बस्तर जैसी संवेदनशील जगहों पर भय का पर्याय था। ऐसे आतंकी का समर्थन करना न केवल क्रूरता का महिमामंडन है, बल्कि हिंसा को वैचारिक संरक्षण देने की खतरनाक कोशिश भी है।

अभाविप जेएनयू इन नारों को राष्ट्र विरोधी मानती है और दिल्ली की सड़कों पर माओवादी हिंसा का गुणगान करने वाले देश विरोधी तत्वों का कड़ा विरोध करती है। इंडिया गेट पर लगाए गए देश विरोधी नारों में शामिल लोगों में से कुछ वही थे जो जेएनयू में हिडमा के समर्थन में पर्चे बांट रहे थे। यह घटनाएँ स्पष्ट करती हैं कि वामपंथी संगठन पर्यावरण, छात्र समस्याओं, या सामाजिक मुद्दों का उपयोग केवल अपने नक्सल समर्थक एजेंडे के लिए कर रहे हैं और ये सभी वामपंथी संगठन देश के लिए खतरा हैं।

अभाविप जेएनयू के अध्यक्ष मयंक पंचाल ने कहा, "जिस प्रदर्शन का उद्देश्य प्रदूषण के खिलाफ आवाज उठाना था, उसे वामपंथी तत्वों ने माओवादी आतंकवाद के समर्थन का मंच बना दिया। यह दिल्ली की जनता और देश के सुरक्षा बलों का अपमान है। ऐसे कृत्यों पर कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए।"

अभाविप जेएनयू के मंत्री प्रवीण पीयूष ने कहा, "हिडमा के लिए नारे लगाना किसी भी लोकतांत्रिक समाज में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। यह सीधे-सीधे आतंकवाद के पक्ष में खड़े होने का कृत्य है। अभाविप इसकी घोर निंदा करती है और देश की सुरक्षा एजेंसियों से मांग करती है कि इस मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।"

अभाविप नक्सलवाद के समर्थन और किसी भी प्रकार की आतंक मित्र राजनीति का दृढ़ता से विरोध जारी रखेगी। देश के सैनिकों का सम्मान और निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है, और किसी भी मंच पर आतंकी तत्वों का महिमामंडन राष्ट्र के खिलाफ गंभीर अपराध है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि इस प्रकार के राष्ट्र विरोधी नारों की निंदा की जानी चाहिए। हमें अपने देश की सुरक्षा को सर्वोपरि मानना चाहिए और किसी भी प्रकार की नक्सलवाद के समर्थन की कड़ी निंदा करनी चाहिए।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभाविप का क्या कहना है?
अभाविप ने वामपंथी संगठनों द्वारा नारेबाजी की कड़ी निंदा की है और इसे राष्ट्र विरोधी करार दिया है।
क्या पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए?
हाँ, अभाविप का मानना है कि पुलिस को इस मामले में उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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