क्या अविमुक्तेश्वरानंद में अहंकार है और ज्ञान शून्य है?
सारांश
मुख्य बातें
प्रयागराज, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। माघ मेला इस समय अपने धार्मिक महत्व के साथ ही साथ विवादों और बयानों को लेकर भी चर्चा में है। साधु-संतों के आचरण, परंपराओं और अधिकारों पर उठते सवालों के बीच किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत की। उन्होंने अपने आध्यात्मिक जीवन के साथ-साथ माघ मेले में हुई ताज़ा विवाद पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी।
ममता कुलकर्णी ने माघ मेले में न जाने के अपने कारण बताते हुए कहा, ''मेरा जीवन अब पूरी तरह से साधना और तप में समर्पित है। मैं पिछले २५ वर्षों से तप कर रही हूं। मैं रोजाना गंगा जल से स्नान करती हूं और उसके बाद ही पूजा-पाठ करती हूं। इस समय गुप्त नवरात्रि चल रही हैं और इस दौरान मैं कहीं भी बाहर नहीं जाती, इसी वजह से मैं माघ मेले में नहीं जा सकी।''
इंटरव्यू के दौरान जब माघ मेले में पालकी रोके जाने के विरोध में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के धरने पर सवाल पूछा गया तो ममता कुलकर्णी ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा, ''इस पूरे प्रकरण में शंकराचार्य की वजह से उनके शिष्यों को लात-घूंसे खाने पड़े। यदि स्नान ही करना था, तो पालकी से उतरकर पैदल स्नान किया जा सकता था। गुरु होने का अर्थ जिम्मेदारी से भरा आचरण होना चाहिए, न कि ऐसी जिद, जिसकी कीमत शिष्यों को चुकानी पड़े।''
ममता कुलकर्णी ने आगे कहा, ''कानून सभी के लिए समान है, चाहे वह राजा हो या रंक, गुरु हो या शिष्य। केवल चार वेद कंठस्थ करने से कोई शंकराचार्य नहीं बनता। उनमें काफी अहंकार है और आत्मज्ञान शून्य है।''
१८ जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी के साथ संगम स्नान के लिए निकले थे। उनके साथ करीब २०० शिष्य उपस्थित थे। मेला प्रशासन ने भारी भीड़ का हवाला देते हुए संगम स्नान पर रोक लगा दी और पैदल स्नान करने की बात कही।
प्रशासन का कहना था कि पालकी के साथ आगे बढ़ने से भगदड़ की स्थिति बन सकती थी। हालांकि शंकराचार्य पालकी से संगम के पास जाना चाहते थे, इसी बात को लेकर प्रशासन और शंकराचार्य के बीच करीब तीन घंटे तक टकराव हुआ।
तीन घंटे की बातचीत के बाद भी जब सहमति नहीं बनी, तो पुलिस ने सख्ती से शिष्यों को एक-एक कर वहां से हटाया। शंकराचार्य पक्ष का आरोप है कि पुलिस ने साधु-संतों और बटुकों के साथ मारपीट और अभद्रता की। प्रशासन ने बैरिकेडिंग तोड़ने और अव्यवस्था फैलाने का आरोप लगाया। इसके बाद से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले पांच दिनों से अपने शिविर के बाहर पालकी पर धरना दे रहे हैं।