क्या किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी ने पद छोड़ने के संकेत दिए?

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क्या किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी ने पद छोड़ने के संकेत दिए?

सारांश

महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में अपने पद के बारे में विचार व्यक्त करते हुए संकेत दिया है कि वह इसे छोड़ने पर गंभीरता से विचार कर रही हैं। उनके अनुसार, यह पद अब मजाक सा प्रतीत होता है। जानिए इसके पीछे की सच्चाई।

Key Takeaways

  • महामंडलेश्वर का पद अब एक गंभीर जिम्मेदारी नहीं रह गया है।
  • आध्यात्मिकता में सच्चे ज्ञान की आवश्यकता है।
  • आजकल कई लोग बिना ज्ञान के महामंडलेश्वर बने हुए हैं।
  • असली ज्ञान वह है, जिससे आत्मज्ञान की प्राप्ति हो।
  • सच्चा गुरु वह होता है, जो अहंकार से दूर हो।

प्रयागराज, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आध्यात्मिक क्षेत्र में महामंडलेश्वर, जगद्गुरु और शंकराचार्य जैसे प्रतिष्ठित पदों की संख्या में जिस तेजी से वृद्धि हो रही है, उसी बीच किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी ने राष्ट्र प्रेस को दिए गए इंटरव्यू में अपने पद के बारे में ऐसी बातें कहीं, जिन्होंने समाज में हलचल मचा दी।

उन्होंने कहा कि महामंडलेश्वर का पद अब उनके लिए एक गंभीर आध्यात्मिक जिम्मेदारी की तरह नहीं, बल्कि मजाक जैसा प्रतीत होने लगा है।

राष्ट्र प्रेस से बातचीत में ममता कुलकर्णी ने कहा, ''जब मैंने इस आध्यात्मिक यात्रा में गहराई से प्रवेश किया, तब मुझे कई सच्चाइयों का ज्ञान हुआ। बाहरी दुनिया जो बेहद पवित्र और ज्ञान से परिपूर्ण लगती है, अंदर जाकर देखने पर वैसी नहीं लगती। आज चारों ओर ऐसे लोग घूम रहे हैं, जो खुद को महामंडलेश्वर या जगद्गुरु घोषित कर रहे हैं, लेकिन उनके पास न तो सही ज्ञान है और न ही आत्मज्ञान। केवल वस्त्र धारण करने या किसी पद पर पहुंच जाने से कोई संत नहीं बनता।''

ममता कुलकर्णी ने धार्मिक ग्रंथों का उदाहरण देते हुए आत्मज्ञान के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ''वेदों और उपनिषदों में भी यह सिखाया गया है कि केवल मंत्रों को याद कर लेना या शास्त्रों का ज्ञान होना ही सब कुछ नहीं है। असली ज्ञान वह है, जिससे व्यक्ति अपने भीतर की सच्चाई को समझ सके।''

ममता ने श्वेतकेतु और उनके पिता उद्दालक ऋषि के संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि जब चारों वेद कंठस्थ करने के बाद भी आत्मज्ञान नहीं मिला, तो वह ज्ञान अधूरा था। आज भी यही स्थिति देखने को मिल रही है।

उन्होंने कहा, ''मैंने अपने आध्यात्मिक सफर में बहुत कम सच्चे संत देखे हैं। दस में से नौ लोग ऐसे मिले, जो झूठे थे और केवल पद और पहचान के पीछे भाग रहे थे। इसी अनुभव के चलते मुझे अब महामंडलेश्वर का पद एक हास्य विनोद जैसा लगने लगा है। जब हर दूसरे दिन नए महामंडलेश्वर बनाए जा रहे हों, तो ऐसे में पदों की गंभीरता अपने आप समाप्त हो जाती है।''

किन्नर अखाड़े के संस्थापक रहे ऋषि अजय दास पर भी ममता कुलकर्णी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "ऐसे कई लोग हैं, जिन्हें धर्म, वेद और परंपरा की बुनियादी समझ भी नहीं है, लेकिन वे बड़े-बड़े मंचों से उपदेश देते हैं। नृत्य और संगीत को लेकर टिप्पणियां करते हैं। भारतीय परंपरा में नृत्य और संगीत को कभी तुच्छ नहीं समझा गया। भगवान शिव का नटराज स्वरूप और श्रीकृष्ण की लीलाएं इसके उदाहरण हैं।"

ममता कुलकर्णी ने कहा कि वह महामंडलेश्वर का पद छोड़ने पर गंभीरता से विचार कर रही हैं। उन्होंने कहा, "मुझे अंदर से संकेत मिल रहा है कि मुझे भी अपने इस पद को छोड़ना चाहिए, क्योंकि जब चारों ओर नकली लोग भरे हों, तो ऐसे पद पर बने रहने का कोई अर्थ नहीं रह जाता। सत्य के लिए किसी विशेष वस्त्र या पद की आवश्यकता नहीं होती। सच्चा गुरु वही होता है, जो तपस्वी हो, अहंकार से दूर हो और दिखावे से परे जीवन व्यतीत करता हो।"

Point of View

जो हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या वास्तव में आध्यात्मिकता का स्तर गिर रहा है? क्या हमें सच्चे ज्ञान की आवश्यकता है?
NationPress
04/02/2026

Frequently Asked Questions

महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी ने पद छोड़ने का संकेत क्यों दिया?
उन्होंने कहा कि महामंडलेश्वर का पद अब मजाक जैसा लगता है और वह इसे छोड़ने पर गंभीरता से विचार कर रही हैं।
क्या ममता कुलकर्णी ने किसी विशेष कारण का जिक्र किया?
उन्होंने कहा कि आजकल बहुत से लोग बिना सही ज्ञान के महामंडलेश्वर बने हुए हैं, जिससे पद की गंभीरता खत्म हो रही है।
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