महिला आरक्षण विधेयक: राजनीतिक सशक्तीकरण का महत्वपूर्ण कदम, विपक्ष की फर्जी कहानियों का पर्दाफाश
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण विधेयक महिलाओं के राजनीतिक सशक्तीकरण के लिए महत्वपूर्ण है।
- विपक्ष द्वारा फर्जी कहानियों का निर्माण किया जा रहा है।
- पीएम मोदी ने सभी विपक्षी दलों से समर्थन की अपील की है।
- यूसीसी धार्मिक आस्था की स्वतंत्रता प्रदान करेगा।
- महिला आरक्षण को लागू करने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए।
नई दिल्ली, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा के प्रमुख नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर कहा कि यह महिलाओं के राजनीतिक सशक्तीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। लेकिन कुछ तत्व इसे शर्तों के आधार पर अटकाने और भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। यह उनके राजनीतिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। आखिरकार, आप कितने समय तक लोगों को गुमराह करते रहेंगे और भ्रम फैलाने का प्रयास करेंगे?
राष्ट्र प्रेस से बातचीत में नकवी ने कहा कि विपक्ष के लोग कब तक फर्जी और बनावटी किस्से गढ़कर समाज में टकराव उत्पन्न करने का प्रयास करेंगे। महिला आरक्षण किसी धर्म या जाति के आधार पर नहीं है। हर एक महिला, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति से संबंधित हो, इसका लाभ ले सकती है।
कांग्रेस पार्टी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह आदत हो गई है कि अगर वे खुद कुछ नहीं कर सकते तो दूसरों का काम बिगाड़ देंगे। यदि वे जीत नहीं सकते, तो दूसरों को खेलने भी नहीं देंगे। जो कार्य आपको करना चाहिए था, वह आप नहीं कर पाए। पीएम मोदी रिफॉर्म, ट्रांसफॉर्म और परफॉर्म के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं, तो इससे आपको परेशानी होने लगती है।
नकवी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी विपक्षी दलों से अपील की है कि 16 अप्रैल से बुलाए गए विशेष सत्र में इस विधेयक का समर्थन करें। वहीं, सोनिया गांधी पत्र लिखकर इसके क्रियान्वयन पर प्रश्न उठा रही हैं।
उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि कांग्रेस पार्टी को यह समझ नहीं आ रहा कि वे क्या कर रहे हैं। कुछ लोग अपने पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मारते हैं, और कांग्रेस के नेता तो कुल्हाड़ी जेब में रखते हैं। जब भी मौका मिलता है, अपने पैरों पर मार लेते हैं। इन गलतियों का बंटाधार हो रहा है। महिला आरक्षण संबंधित कानून बनेगा और इसे लटकाने की कोशिश से आप इसे नहीं रोक पाएंगे।
यूसीसी पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान पर नकवी ने कहा कि ममता बनर्जी चुनावी माहौल में कह रही हैं कि यूसीसी देश के लिए खतरनाक है और बंगाल में लागू नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि यूसीसी में धार्मिक आस्था पूरी तरह स्वतंत्र रहेगी। लोग अपनी धार्मिक आस्था के साथ काम कर सकेंगे। हां, सिविल कानूनों में जो जटिलताएं हैं, उनसे लोगों को मुक्ति मिलेगी और यह एक बहुत बड़ा सुधार होगा। मुझे लगता है कि इसका कार्यान्वयन अब आवश्यक हो गया है।