क्या मां काली की शक्ति से ममता बनर्जी ने जीती चुनाव?
सारांश
Key Takeaways
- ममता कुलकर्णी का बयान धार्मिक आस्था को राजनीति से जोड़ता है।
- भाजपा को सलाह दी गई है कि कठोर रवैया न अपनाएं।
- धर्म की सच्चाई और भक्ति की वास्तविकता पर जोर दिया गया।
प्रयागराज, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चुनावी जीत को मां काली की शक्ति से जोड़ा है।
राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए ममता कुलकर्णी ने कहा, ''पिछले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने बंगाल में अपनी पूरी ताकत झोंकी थी, फिर भी जीत भाजपा को नहीं मिली। यह जीत किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि मां काली और महाकाली की शक्ति की जीत थी। ममता बनर्जी ने चुनाव नहीं जीता, बल्कि उन्हें मां काली ने जिताया था।''
ममता कुलकर्णी ने बताया कि भविष्य के चुनावों में क्या होगा, यह पूरी तरह से भगवती की इच्छा पर निर्भर करता है।
उन्होंने भाजपा को सलाह दी कि किसी भी मामले में अति कठोर रवैया नहीं अपनाएं। संतुलन ही सबसे बड़ी ताकत है।
अपने बयान में ममता कुलकर्णी ने धर्म और भक्ति पर भी खुलकर चर्चा की। उन्होंने कहा, ''आज के समय में लोग कैमरे लेकर मंदिरों में घूमते हैं और इसे भक्ति समझते हैं, जबकि सच्ची भक्ति दिखावे से नहीं होती। मुझे लगभग २५ वर्ष हो गए हैं कि मैंने किसी मंदिर में नहीं गईं। मैंने घर पर रहकर अपने गुरु के बताए मार्ग पर ध्यान और तप किया। अगर ध्यान में सच्ची शक्ति हो, तो भगवान को कहीं ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ती, वह स्वयं आपके पास आ जाते हैं।''
ममता कुलकर्णी ने धर्म की परिभाषा को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा, ''धर्म का मतलब सिर्फ पूजा-पाठ नहीं है, बल्कि सत्य है। सत्य ही धर्म है और धर्म की कोई अलग भाषा या नियम नहीं होते। अगर कोई बात गलत है, तो वह गलत ही होगी, चाहे वह किसी भी धर्म से संबंधित क्यों न हो। सही और गलत की पहचान ही असली धर्म है।''