क्या मार्गशीर्ष मोक्षदा एकादशी पर व्रत और दान का विशेष महत्व है?
सारांश
Key Takeaways
- मार्गशीर्ष मोक्षदा एकादशी का व्रत पापों से मुक्ति दिलाता है।
- इस दिन तुलसी मैया के पास दीपक जलाना आवश्यक है।
- उपवास, पूजा और दान का महत्व है।
- व्रत विधिपूर्वक करने के लिए विशेष विधियाँ हैं।
- बीमार और गर्भवती के लिए व्रत अनिवार्य नहीं है।
नई दिल्ली, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी तिथि सोमवार को आ रही है। मान्यता है कि इस एकादशी पर तुलसी मैया के पास दीपक जलाना आवश्यक है। इसके साथ ही 7 बार परिक्रमा करना चाहिए।
द्रिक पंचांग के अनुसार, सोमवार को सूर्य वृश्चिक राशि में और चंद्रमा रात 11 बजकर 18 मिनट तक मीन राशि में रहेंगे, इसके बाद मीन राशि में गोचर करेंगे। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय सुबह 8 बजकर 15 मिनट से शुरू होकर 9 बजकर 33 मिनट तक रहेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्री हरि ने अर्जुन को गीत का उपदेश दिया था, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन उपवास, पूजा और दान करने से पापों का नाश होता है और कई गुना फल मिलता है। यह एकादशी व्यक्ति को सांसारिक बंधनों से मुक्ति दिलाने वाली मानी जाती है।
धार्मिक ग्रंथों में उत्पन्ना एकादशी के लिए कुछ उपायों के बारे में बताया गया है। इस तिथि पर व्रत विधिपूर्वक करना चाहिए।
विधि-विधान से व्रत करने के लिए ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें। फिर मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें और गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें। एक चौकी पर कपड़ा बिछाकर पूजा सामग्री रखें। विष्णु भगवान की प्रतिमा स्थापित करें और भगवान को धूप, दीप, अक्षत और पीले फूल चढ़ाएं। व्रत कथा सुनें और भगवान विष्णु की आरती करें। उसके बाद आरती का आचमन करें। फिर दिनभर निराहार रहें और भगवान का ध्यान करें। मंत्र जप और ग्रंथों का पाठ करें और शाम को तुलसी मैया पर दीपक जलाना न भूलें।
जो जातक एकादशी पर व्रत नहीं रख सकते हैं, वे विष्णु जी की पूजा करें। दान-पुण्य करें, मंत्र जप और ग्रंथों का पाठ करें। बीमार, गर्भवती और बच्चों के लिए व्रत करना जरूरी नहीं होता है। ये लोग पूजा-पाठ करके भी एकादशी व्रत के समान पुण्य कमा सकते हैं, लेकिन इस दिन चावल का सेवन भी न करें।