मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास तेज
सारांश
Key Takeaways
- समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी प्रावधानों का निर्माण करना है।
- मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस प्रक्रिया को तेज करने का निर्देश दिया है।
- एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा।
- यह कदम कानूनी एकरूपता की दिशा में महत्वपूर्ण है।
- यूसीसी का लागू होना, अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।
भोपाल, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश सरकार ने 'एक राष्ट्र, एक कानून' के सिद्धांत को साकार करने के लिए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने की प्रक्रिया में कदम बढ़ाने की तैयारी कर ली है।
राज्य के यूसीसी विधेयक का प्रारूप तैयार करने के लिए जल्द ही एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति की अध्यक्षता एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे एवं इसमें सामाजिक कार्यकर्ता, वरिष्ठ वकील, विश्वविद्यालय के कुलपति और कानूनी विशेषज्ञ शामिल होंगे।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में गृह विभाग को इस प्रक्रिया को तेज करने का निर्देश दिया है। उनका लक्ष्य 2026 के अंत तक, या उससे पहले दिवाली के अवसर पर इसे लागू करना है।
गृह विभाग उत्तराखंड (2024 में यूसीसी को लागू करने वाला पहला राज्य) और गुजरात (जिसने मार्च 2026 में अपना यूसीसी बिल पारित किया) द्वारा अपनाए गए यूसीसी मॉडलों का गहन अध्ययन कर रहा है। विभाग उनके कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों और प्रक्रियाओं का विश्लेषण कर रहा है।
सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री को पहले ही इस संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की जा चुकी है।
प्रस्तावित पांच-सदस्यीय समिति मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया की निगरानी करेगी। यह समिति भारतीय जनता पार्टी-शासित अन्य राज्यों में गठित समान समितियों से अनुभव प्राप्त करेगी।
अधिकारियों ने कहा कि गृह विभाग मसौदा तैयार करेगा, जबकि मंत्री अन्य स्थानों पर यूसीसी लागू करते समय सामने आई समस्याओं की समीक्षा करेंगे।
यह पहल 2022 में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा की गई घोषणा के बाद की जा रही है, जो उस समय पूरी नहीं हो पाई थी।
सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि राष्ट्रीय एकता और सभी नागरिकों के सुरक्षित भविष्य के लिए समान कानूनी ढांचे की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव के बिना सभी पर समान कानून लागू होने चाहिए।
सारंग ने पिछली कांग्रेस सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने समाज को बांटने का कार्य किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान प्रयास ऐतिहासिक असंतुलन को ठीक करने के लिए समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं।
इस घटनाक्रम ने राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि यह यूसीसी का मुद्दा गंभीर समस्याओं जैसे गैस और उर्वरकों की कमी से लोगों का ध्यान भटकाने का प्रयास है।
उन्होंने विभिन्न धर्मों के लोगों पर इसके संभावित प्रभाव पर सवाल उठाए और इसे शासन से जुड़े वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए महज 'बयानबाजी' कहा।
मध्य प्रदेश सरकार की यह पहल, कानूनी एकरूपता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में यूसीसी पर चल रही राष्ट्रीय चर्चाओं के अनुरूप है।
उत्तराखंड और गुजरात पहले ही अपने-अपने संस्करण लागू कर चुके हैं, जिसमें लैंगिक न्याय और समानता को ध्यान में रखते हुए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए समान नियमों पर जोर दिया गया है।
समिति के गठन के साथ ही व्यापक परामर्श प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि यूसीसी समानता और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देगा, जबकि विपक्ष तात्कालिक आजीविका संबंधी चिंताओं की कीमत पर इसके राजनीतिकरण के खिलाफ चेतावनी दे रहा है।
इस घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश को एक ऐसा संभावित अगला राज्य बना दिया है जो लंबे समय से चर्चित संवैधानिक निर्देश, समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।