मुंबई से विजयदुर्ग के लिए 1 मार्च से शुरू होगी रो-रो फेरी सेवा: नितेश राणे
सारांश
Key Takeaways
- रो-रो फेरी सेवा 1 मार्च से शुरू होगी।
- यह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का ड्रीम प्रोजेक्ट है।
- पहला रूट मुंबई से विजयदुर्ग होगा।
- सेवा से पर्यटन और रोजगार में वृद्धि की उम्मीद है।
- भविष्य में अन्य राज्यों को भी जोड़ा जाएगा।
मुंबई, 25 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने एम2एम फेरी सेवा और राज्य के अन्य समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि यह परियोजना मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का स्वप्न प्रोजेक्ट है, जिसकी शुरुआत उस समय हुई थी जब मुख्यमंत्री के पास 2014 से 2019 के बीच बंदरगाह विभाग की जिम्मेदारी थी।
नितेश राणे ने यह भी बताया कि 1 मार्च से इस परियोजना की औपचारिक शुरुआत की जाएगी। पहला मार्ग मुंबई से विजयदुर्ग तक होगा। वर्तमान में मुंबई से अलीबाग तक रो-रो सेवा चल रही है और अब इसे बढ़ाते हुए विजयदुर्ग तक जल परिवहन सेवा शुरू की जाएगी। भविष्य में रत्नागिरी, रायगढ़ और अन्य राज्यों को भी जलमार्ग से जोड़ने की योजना है। मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इससे पर्यटन और रोजगार दोनों में वृद्धि होगी।
उन्होंने राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि चुनावों के दौरान कुछ संगठन 'जय भीम' और 'जय मीम' जैसे नारे लगाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद केवल एक ही नारा रह जाता है। राणे ने आरोप लगाया कि ऐसे संगठनों द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर टीपू सुल्तान की तस्वीरें लगाई जाती हैं, जबकि डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीरें गायब होती हैं। नगर निकाय संविधान के अनुसार काम करते हैं, और यदि कोई विवादित गतिविधि होती है, तो उचित कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने मदरसों से जुड़े एक वायरल वीडियो का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि किसी भी संस्था में बच्चों के साथ हिंसा होती है तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि मदरसों की व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए और जहाँ आवश्यक हो, वहां ऑडिट और जांच कर उन्हें आधुनिक शिक्षा संस्थानों में परिवर्तित किया जाना चाहिए। इस दिशा में वह मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे। कुछ राज्यों में ऐसे कदम उठाए गए हैं, जैसे असम और उत्तर प्रदेश में मदरसों को स्कूलों में बदलने की पहल हुई है।
रो-रो फेरी सेवा एक आधुनिक जल परिवहन प्रणाली है, जो यात्रियों को अपने वाहनों (कार, बाइक, बस, ट्रक) के साथ सीधे जलमार्ग के जरिए जहाज पर सवार होने और उतरने की सुविधा देती है। इसमें विशेष रैंप होते हैं, जिससे वाहन आसानी से अंदर आ-जा सकते हैं।