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क्या सिर्फ भाजपा को ही शीर्ष तक नहीं पहुंचाया, बल्कि राम मंदिर आंदोलन में भी निभाई थी अहम भूमिका? ऐसी है मुरली मनोहर जोशी की कहानी

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क्या सिर्फ भाजपा को ही शीर्ष तक नहीं पहुंचाया, बल्कि राम मंदिर आंदोलन में भी निभाई थी अहम भूमिका? ऐसी है मुरली मनोहर जोशी की कहानी

सारांश

मुरली मनोहर जोशी का जीवन एक ऐसे राजनीतिक सफर की कहानी है, जिसने भाजपा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उनके योगदान और राम मंदिर आंदोलन में उनकी भूमिका को समझने के लिए पढ़ें यह लेख।

मुख्य बातें

मुरली मनोहर जोशी का जन्म उत्तराखंड में हुआ था।
उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई।
वे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे।
उनकी छवि सच्ची और स्पष्ट थी।
उन्होंने एकता यात्रा का आयोजन किया।

नई दिल्ली, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मुरली मनोहर जोशी, एक ऐसी प्रमुख शख्सियत जिनके बिना एक समय में भारतीय जनता पार्टी का वह नारा अधूरा था, जिसे पार्टी के कार्यकर्ता कहते थे, 'भारत मां की तीन धरोहर, अटल, आडवाणी, मुरली मनोहर।' यही कारण है कि आज के राजनीतिक परिदृश्य में विश्व की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा की चर्चा अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के साथ-साथ मुरली मनोहर जोशी के बिना नहीं की जा सकती।

5 जनवरी 1934 को मुरली मनोहर जोशी का जन्म उत्तराखंड के नैनीताल में हुआ। एक राजनीतिक दार्शनिक के रूप में, जोशी की सबसे बड़ी संपत्ति उनकी साफ-सुथरी छवि थी। सियासत में ऊंचे पद पर पहुंचने के बावजूद वे जनता से जुड़े रहे। अल्मोड़ा से इलाहाबाद और फिर बनारस के रास्ते कानपुर को अपनी कर्मभूमि बनाया और खुली जीपों में घूमकर जनता से संवाद किया। इसी जुड़ाव ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बना दिया और हर बार मुरली मनोहर जोशी ने सीटें बदलने पर भी संसद तक अपनी पहुंच बनाई।

एक वैज्ञानिक और प्रख्यात विद्वान, मुरली मनोहर जोशी राम मंदिर आंदोलन के अग्रणी नेताओं में रहे। वे अपने जोश भरे और तथ्यात्मक भाषणों के लिए जाने जाते थे। महज 10 वर्ष की आयु में वे आरएसएस से जुड़े और 1949 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में शामिल हुए, इसके बाद 1957 में जनसंघ में भी शामिल हुए।

1987-90 में उन्होंने वैचारिकी नामक समूह की स्थापना की। इसके अतिरिक्त, वे ज्ञान कल्याण चैरिटेबल ट्रस्ट और भाउ राव देवरस न्यास, माधव शोध संस्थान के पूर्णकालिक सदस्य रहे। जोशी भारतीय जनसंघ के इलाहाबाद जोन के कार्यवाहक सचिव भी रहे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में, जोशी ने 1992 में गणतंत्र दिवस पर ऐतिहासिक एकता यात्रा की, जिसका उद्देश्य लाल चौक पर झंडा फहराना था। यह घटना अयोध्या की घटना के साथ मिलकर देश के भविष्य पर गहरी छाप छोड़ गई।

जोशी ने अयोध्या आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आडवाणी के बाद, मुरली मनोहर जोशी ने इस आंदोलन को उसके लक्ष्य तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लाल कृष्ण आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या की रथ यात्रा ने राम मंदिर आंदोलन में ऊर्जा भरी।

भाजपा की आधिकारिक वेबसाइट पर उनके परिचय में उल्लेख है कि राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण से जुड़े आंदोलन के दौरान उन्हें 8 दिसंबर 1992 को गिरफ्तार किया गया था। अयोध्या मामले में उन्हें माता टीला पर लालकृष्ण आडवाणी और अशोक सिंघल के साथ हिरासत में लिया गया।

जब अयोध्या में बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया गया, उस समय मुरली मनोहर जोशी भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन के भाजपा पर पड़ने वाले प्रभावों को भली-भांति समझा और उसी के अनुसार रणनीति तैयार की।

संपादकीय दृष्टिकोण

मुरली मनोहर जोशी की कहानी हमें यह बताती है कि राजनीति में किस तरह से व्यक्तिगत मूल्यों और जनता के साथ जुड़ाव महत्वपूर्ण होते हैं। उनकी नीतियों और कार्यों ने भाजपा को एक नई दिशा दी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुरली मनोहर जोशी का जन्म कब हुआ था?
उनका जन्म 5 जनवरी 1934 को उत्तराखंड के नैनीताल में हुआ।
राम मंदिर आंदोलन में मुरली मनोहर जोशी की क्या भूमिका थी?
उन्होंने अयोध्या आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इसे अपने लक्ष्य तक पहुंचाने में मदद की।
जोशी का राजनीतिक करियर कैसे शुरू हुआ?
उन्होंने 10 वर्ष की आयु में आरएसएस से जुड़कर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की।
जोशी ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में क्या किया?
उन्होंने 1992 में ऐतिहासिक एकता यात्रा का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य लाल चौक पर झंडा फहराना था।
कब मुरली मनोहर जोशी को गिरफ्तार किया गया था?
उन्हें 8 दिसंबर 1992 को राम मंदिर आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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