क्या एनसीआरटीसी ने दुहाई डिपो में ‘सोलर ऑन ट्रैक’ योजना शुरू की, जो देश में पहली पहल है?

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क्या एनसीआरटीसी ने दुहाई डिपो में ‘सोलर ऑन ट्रैक’ योजना शुरू की, जो देश में पहली पहल है?

सारांश

एनसीआरटीसी ने दुहाई डिपो में ‘सोलर ऑन ट्रैक’ योजना शुरू की है, जो देश में पहली बार पटरियों पर सोलर पैनल लगाने की अनोखी पहल है। इससे ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी।

मुख्य बातें

सोलर पैनल का उपयोग कर हरित ऊर्जा उत्पादन।
प्रति वर्ष 17,500 किलोवाट घंटे ऊर्जा उत्पन्न होगी।
16 टन CO2 उत्सर्जन में कमी।
नेट-जीरो ऊर्जा खपत का लक्ष्य।
अन्य मेट्रो प्रणालियों के लिए प्रेरणा।

गाजियाबाद, 12 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) ने सतत और ऊर्जा-कुशल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल की शुरुआत की है। दुहाई स्थित नमो भारत डिपो में ‘सोलर ऑन ट्रैक’ योजना का शुभारंभ किया गया है, जिसके तहत पटरियों पर सोलर पैनल लगाए गए हैं।

यह देश में किसी भी आरआरटीएस या मेट्रो प्रणाली में अपनी तरह की पहली योजना है, जो ट्रैक के अप्रयुक्त स्थान का उपयोग करते हुए हरित ऊर्जा उत्पादन की दिशा में एक नया अध्याय जोड़ती है। इस पायलट परियोजना के अंतर्गत दुहाई डिपो में पिट व्हील ट्रैक पर 550 वाट पीक क्षमता के 28 सोलर पैनल लगाए गए हैं। लगभग 70 मीटर लंबे इस ट्रैक पर लगाए गए पैनलों की कुल क्षमता 15.4 किलोवाट पीक है।

अनुमान है कि इससे प्रति वर्ष लगभग 17,500 किलोवाट घंटे ऊर्जा उत्पन्न होगी, जिससे करीब 16 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी। यह न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि ऊर्जा लागत में भी कमी लाएगा। एनसीआरटीसी ने बताया कि ‘सोलर ऑन ट्रैक’ योजना, नमो भारत की आधुनिक परिवहन प्रणाली को ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

निगम का उद्देश्य है कि भविष्य में अपने सभी प्रतिष्ठानों को नेट-जीरो ऊर्जा खपत मॉडल पर लाया जाए। इसके तहत एनसीआरटीसी अपनी कुल ऊर्जा आवश्यकता का 70 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से पूरा करने की योजना पर कार्य कर रहा है। संगठन अपनी सौर नीति के अंतर्गत स्टेशनों, डिपो और भवनों की छतों पर 15 मेगावाट पीक इन-हाउस सौर ऊर्जा उत्पादन की योजना बना चुका है, जिसमें से 5.5 मेगावाट ऊर्जा का उत्पादन पहले से ही किया जा रहा है।

अब ‘सोलर ऑन ट्रैक’ परियोजना इस दिशा में उठाया गया एक और महत्वपूर्ण कदम है। इसके अलावा, एनसीआरटीसी ने नमो भारत कॉरिडोर पर वर्षा जल संचयन प्रणाली और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था भी की है। वहीं, नमो भारत ट्रेनें अत्याधुनिक रीजनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम से लैस हैं, जो ब्रेक लगाने पर ट्रेन की गतिज ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदल देती हैं।

नवीकरणीय ऊर्जा के इस समावेश के साथ, एनसीआरटीसी न केवल पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहित कर रहा है, बल्कि देश में शहरी परिवहन प्रणालियों को हरित और ऊर्जा-कुशल भविष्य की ओर अग्रसर कर रहा है। ‘सोलर ऑन ट्रैक’ पहल आने वाले समय में अन्य मेट्रो और आरआरटीएस प्रणालियों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि देश की शहरी परिवहन प्रणालियों को भी एक हरित दिशा मिलेगी।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

‘सोलर ऑन ट्रैक’ योजना का उद्देश्य क्या है?
इस योजना का उद्देश्य हरित ऊर्जा उत्पादन के माध्यम से ऊर्जा-कुशल परिवहन प्रणाली का विकास करना है।
इस योजना से कितनी ऊर्जा उत्पन्न होगी?
इससे लगभग 17,500 किलोवाट घंटे ऊर्जा प्रति वर्ष उत्पन्न होने की उम्मीद है।
क्या यह योजना पहली बार लागू की गई है?
हाँ, यह देश में किसी भी आरआरटीएस या मेट्रो प्रणाली में अपनी तरह की पहली योजना है।
इस योजना का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इससे लगभग 16 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो पर्यावरण संरक्षण में मदद करेगा।
क्या एनसीआरटीसी के अन्य परियोजनाएँ भी हैं?
हाँ, एनसीआरटीसी ने वर्षा जल संचयन प्रणाली और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था भी की है।
राष्ट्र प्रेस
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