क्या नेहा सिंह राठौड़ ने यूजीसी के नियमों का समर्थन किया है, विरोध करने वालों को दी उदार बनने की सलाह?
सारांश
Key Takeaways
- यूजीसी के नए नियम समाज में समानता को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए हैं।
- नेहा सिंह राठौड़ ने इन नियमों का समर्थन किया है।
- समाज में बदलाव के समय कुछ लोग खुश होते हैं और कुछ नाराज।
- जाति व्यवस्था से ऊपर उठने की आवश्यकता है।
- संविधान ने सभी को अधिकार दिए हैं।
लखनऊ, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा लागू किए गए 'उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले नियम, 2026' पर विवाद तेज हो रहा है। भोजपुरी लोकगायिका नेहा सिंह राठौड़ ने इन नियमों का समर्थन किया है।
नेहा ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि इन नियमों का मूल उद्देश्य समाज में समानता को बढ़ावा देना है। यदि कानून का उद्देश्य भेदभाव या अपमान से बचाना है, तो इसमें क्या समस्या है? गायिका ने स्पष्ट किया, "मैं स्वयं सवर्ण हूं, लेकिन मेरे मन में कोई दुराग्रह नहीं है। जब कानून चोरी के खिलाफ बनता है, तो चोर ही डरता है।"
गायिका ने आरक्षण और एससी-एसटी एक्ट के विरोध का उदाहरण देते हुए कहा कि जब आरक्षण लागू हुआ था, तब भी इसका काफी विरोध हुआ था। आज भी एससी-एसटी एक्ट का विरोध हो रहा है, लेकिन इन कानूनों ने लाखों लोगों को भेदभाव से बचाया है। समाज में बदलाव के समय कुछ लोग खुश होते हैं और कुछ नाराज।
नेहा ने कहा, "जाति व्यवस्था से ऊपर उठें। उदारता से सोचें और विचारों को खुला रखें। अगर कोई विरोध कर रहा है तो या तो वे इस्तीफा दे रहे हैं या फिर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन संविधान ने सभी को अधिकार दिए हैं। सब लोग अपने अधिकारों का उपयोग कर सकते हैं।"
नेहा ने सिलेक्टिव अप्रोच पर सवाल उठाते हुए कहा, "हम संविधान में समानता की बात करते हैं, लेकिन जब उर्दू में कुछ होता है तो चुप रह जाते हैं। अतार्किक बातें करते हैं, लेकिन अगर राजनीतिक पार्टी को फायदा हो या न हो, यह कानून समाज और देश के लिए फायदेमंद है।"
इसके साथ ही नेहा ने शंकराचार्य के विवाद पर कहा, "संतों का मान होना चाहिए। मैंने सुना है कि संतों का दिल बड़ा होता है। अगर गलती हो तो माफी मांग लेनी चाहिए। कोई भी गलती कर सकता है। सरकार कह रही है कि यह विरोधी पार्टी का एजेंडा है, लेकिन मुझे नहीं पता यह किसका एजेंडा है। मुख्य मुद्दे पर बात नहीं हो रही है।"