क्या पहलगाम आतंकी हमले पर एनआईए चार्जशीट दाखिल करेगी?

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क्या पहलगाम आतंकी हमले पर एनआईए चार्जशीट दाखिल करेगी?

सारांश

एनआईए आज जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले की चार्जशीट दाखिल करने जा रही है। यह चार्जशीट आतंकवादियों की पहचान और उनके नेटवर्क को उजागर करने में मदद कर सकती है। क्या यह कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत कदम साबित होगी?

मुख्य बातें

एनआईए चार्जशीट आज दाखिल करेगी।
आतंकवादियों का समर्थन करने वाले स्थानीय निवासियों की गिरफ्तारी।
लश्कर-ए-तैयबा का नाम चार्जशीट में शामिल होने की संभावना।
प्रधानमंत्री का आतंकवाद के खिलाफ सख्त रवैया।

जम्मू, 15 दिसंबर (एनआईए)। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) सोमवार को जम्मू-कश्मीर के जम्मू शहर में स्पेशल एनआईए कोर्ट में 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के मामले में चार्जशीट दाखिल करने की योजना बना रही है।

एनआईए के सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी ने यहां तय कोर्ट में चार्जशीट प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है क्योंकि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत 180 दिन की कानूनी समय सीमा, पहली गिरफ्तारी के बाद से समाप्त हो रही है।

22 जून को पहलगाम इलाके के दो निवासियों, बशीर अहमद जोथर और परवेज अहमद जोथर, को गिरफ्तार किया गया था।

एनआईए के सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तार दोनों व्यक्तियों पर तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों, सुलेमान शाह, हमजा अफगानी उर्फ अफगानी और जिब्रान को पनाह देने और लॉजिस्टिकल सपोर्ट देने का आरोप है, जिन्होंने इस हमले को अंजाम दिया। चार्जशीट दाखिल करने की 180 दिन की समय सीमा 18 दिसंबर को समाप्त हो रही है और एजेंसी आज तय समय सीमा के भीतर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर रही है।

एनआईए ने जांच को पूरा करने के लिए प्रारंभिक 90 दिन की अवधि के अलावा अतिरिक्त 45 दिन का समय मांगा था, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया था।

चार्जशीट में आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और उसके प्रॉक्सी, द रेजिस्टेंस फ्रंट का नाम शामिल होने की संभावना है।

हमले में आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों की संलिप्तता की पुष्टि पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में की थी।

एनआईए ने अब तक 1,000 से अधिक लोगों से पूछताछ की है, जिनमें पर्यटक, टट्टू मालिक, फोटोग्राफर, दुकानदार और कर्मचारी शामिल हैं।

एनआईए ने कोर्ट को सूचित किया है कि आतंकवादी नेटवर्क की पूरी सीमा और ओवरग्राउंड कार्यकर्ताओं की भूमिका स्थापित करने के लिए आगे की फोरेंसिक रिपोर्ट, मोबाइल फोन डेटा विश्लेषण और अतिरिक्त संदिग्धों का सत्यापन किया जा रहा है। पहलगाम आतंकी हमले से पूरा देश गुस्से में था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हत्याओं का जवाब देने के लिए सशस्त्र बलों को पूरी छूट दे दी थी।

ऑपरेशन सिंदूर के तहत, भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान के अंदर लाहौर के पास मुरीदके, बहावलपुर, कोटली और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मुजफ़्फराबाद में नौ आतंकवादी ठिकानों को नष्ट कर दिया।

जब तक पाकिस्तान ने नागरिक और सैन्य ठिकानों पर हमला करके स्थिति को और नहीं बिगाड़ा, तब तक भारतीय सेना ने किसी भी सैन्य ठिकाने पर हमला नहीं किया था।

जवाबी कार्रवाई में, भारतीय सशस्त्र बलों ने सीमा पार किए बिना पाकिस्तान में 11 सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाया।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह हमारे देश के नागरिकों के लिए भी एक संदेश है कि हम अपने अधिकारों और सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पहलगाम आतंकी हमले का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस हमले का मुख्य उद्देश्य भारतीय सुरक्षा बलों को निशाना बनाना और आतंकवाद के जरिए भारत के खिलाफ अस्थिरता पैदा करना था।
एनआईए द्वारा चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया क्या है?
चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया में सबूतों का संग्रह, गवाहों से पूछताछ और कानूनी प्रावधानों का पालन करना शामिल है।
इस हमले से प्रभावित लोग कौन थे?
इस हमले में स्थानीय निवासी, पर्यटक और सुरक्षा बल सभी प्रभावित हुए थे।
राष्ट्र प्रेस