क्या ओडिशा कैबिनेट ने 11 अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी और नई पर्यटन नीति को हरी झंडी दी?
सारांश
Key Takeaways
- नई पर्यटन नीति से ओडिशा के पर्यटन क्षेत्र में सुधार होगा।
- निवेश की शर्तें सरल बनाई गई हैं।
- महिलाओं और अनुसूचित जातियों को विशेष सब्सिडी का लाभ मिलेगा।
- विशेष पर्यटन क्षेत्रों का दायरा बढ़ाया गया है।
- उभरते पर्यटन क्षेत्रों के लिए लक्षित सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
भुवनेश्वर, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में शुक्रवार को लोक सेवा भवन, भुवनेश्वर में आयोजित ओडिशा मंत्रिमंडल की बैठक में विभिन्न विभागों से संबंधित 11 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। इनमें सबसे महत्वपूर्ण ओडिशा पर्यटन (संशोधन) नीति–2026 को स्वीकृति देना था, जिसे राज्य के पर्यटन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।
नई नीति के तहत वर्ष 2022 की पर्यटन नीति में कई आवश्यक संशोधन किए गए हैं। सरकार के अनुसार, 3-स्टार और उससे अधिक श्रेणी के होटलों और रिसॉर्ट्स के लिए न्यूनतम निवेश की शर्त को 50 की-रूम से घटाकर 10 की-रूम कर दिया गया है, जो केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय के मानकों के अनुरूप है। साथ ही, मौजूदा पर्यटन इकाइयों के विस्तार के लिए पात्रता सीमा को 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे उनकी विस्तार प्रक्रिया सरल और तेज होगी।
कैबिनेट ने पूंजी निवेश सब्सिडी ढांचे को भी तर्कसंगत बनाया है। संशोधित नीति के तहत पर्यटन परियोजनाओं को 30 प्रतिशत तक की पूंजी निवेश सब्सिडी मिलेगी, जिसमें 200 करोड़ रुपये तक के निवेश पर अधिकतम 50 करोड़ रुपये और 200 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश पर अधिकतम 100 करोड़ रुपये की सीमा तय की गई है।
इसके अलावा, विशेष पर्यटन क्षेत्रों का दायरा बढ़ाते हुए हिराकुड, सतकोसिया, सिमिलिपाल, रत्नागिरी–उदयगिरी–ललितगिरी और भितरकनिका को शामिल किया गया है। पहले से घोषित विशेष जोनों में चिलिका, केबीके, कंधमाल और गजपति शामिल हैं।
इन विशेष जोनों में स्थापित पर्यटन परियोजनाओं के साथ-साथ महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दिव्यांग उद्यमियों द्वारा संचालित परियोजनाओं को 40 प्रतिशत तक की बढ़ी हुई पूंजी निवेश सब्सिडी मिलेगी। इसमें 200 करोड़ रुपये तक के निवेश पर अधिकतम 60 करोड़ रुपये और 200 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश पर अधिकतम 120 करोड़ रुपये की सीमा तय की गई है।
सरकार ने उभरते पर्यटन क्षेत्रों के लिए लक्षित सब्सिडी देने का भी निर्णय लिया है। इसके तहत संग्रहालयों और विरासत संपत्तियों को 40 प्रतिशत तक, जबकि इलेक्ट्रिक बोट, इलेक्ट्रिक कारवां और कला एवं शिल्प थीम कॉम्प्लेक्स को 50 प्रतिशत तक पूंजी सहायता दी जाएगी। संशोधित नीति में माइस, डेस्टिनेशन वेडिंग, लग्जरी कैंपिंग और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर आधारित पर्यटन उत्पादों के लिए विशेष प्रोत्साहन शामिल हैं।