क्या पद्मश्री संतूर वादक पंडित तरुण भट्टाचार्य ने शास्त्रीय संगीत में नया आयाम जोड़ा?
सारांश
Key Takeaways
- पंडित तरुण भट्टाचार्य ने संतूर वादन में नयापन लाया है।
- उन्होंने पद्मश्री सम्मान प्राप्त किया है।
- संगीत को शांति का संदेश देने का माध्यम मानते हैं।
- संतूर के लिए मानका का आविष्कार किया।
- 63 वर्ष से संगीत की प्रैक्टिस कर रहे हैं।
कोलकाता, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पंडित तरुण भट्टाचार्य को कला के क्षेत्र में पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया गया है। उनकी जड़ें पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हैं।
पंडित तरुण भट्टाचार्य एक प्रसिद्ध संतूर वादक और संगीत के नवप्रवर्तक हैं। उन्होंने नए रागों और शैलियों का विकास किया और संतूर के लिए मानका (फाइल ट्यूनर) का आविष्कार किया, जिससे इसे उच्च सटीकता के साथ ट्यून किया जा सके।
पं. तरुण भट्टाचार्य ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में पद्मश्री सम्मान के लिए भारत सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में बताया कि उन्होंने चार वर्ष की आयु में संतूर सीखना शुरू किया। उनका मानना है कि संगीत ही इस दुनिया में शांति का एकमात्र साधन है।
उन्होंने कहा, "मैं सबसे पहले भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करता हूं। मुझे इस सम्मान के लिए चुना जाना एक बड़ी बात है। यह पुरस्कार मुझे और अधिक काम करने के लिए प्रेरित करता है। मैं इसे एक जिम्मेदारी के रूप में लेता हूं।"
उन्होंने अपने संगीत की यात्रा के बारे में बताया कि उनके पिता भी संगीतकार थे और उनके पहले गुरु उनके पिता थे। बाद में उन्होंने भारत रत्न पंडित रविशंकर से भी सीखा। अब उनकी उम्र 67 वर्ष है, और वे पिछले 63 वर्षों से प्रैक्टिस कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वे हमेशा कुछ अलग करना चाहते थे। वे चाहते थे कि वे जो स्टाइल अपनाएं, वह बाजार में न हो। उन्होंने कहा, "मैं अपने छात्रों से भी यही कहता हूं कि सब अपना-अपना स्टाइल बनाओ। संगीत में वो ताकत है जो हमारे सच्चे हुनर को सामने लाती है। यह नकारात्मकता को दूर करता है और शांति का संदेश देता है।"