क्या पीएम मोदी ने गुजरात के उस गांव और परंपरा का जिक्र किया, जहां घरों में खाना नहीं बनता?
सारांश
Key Takeaways
- गुजरात के चंदनकी गांव की अनोखी कम्युनिटी किचन परंपरा।
- सभी लोग मिलकर एक साथ भोजन करते हैं।
- पारिवारिक और सामाजिक भावना को बढ़ावा देने वाली पहल।
- बुजुर्ग घरों में खाना नहीं बनाते।
- टिफिन सेवा उपलब्ध, स्वास्थ्य में मदद करती है।
नई दिल्ली, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। 'मन की बात' के १३०वें एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को गुजरात के बेचराजी के चंदनकी गांव की एक अनोखी परंपरा के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यह ऐसा गांव है जहां किसी भी घर में खाना नहीं बनता, बल्कि सभी का खाना गांव के कम्युनिटी किचन में तैयार होता है और सब मिलकर एक साथ भोजन करते हैं।
पीएम मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के हर कोने में कुछ विशेष और अद्वितीय देखने को मिलता है। ये चीजें अक्सर मीडिया की चकाचौंध में नजर नहीं आतीं, लेकिन यही हमारी असली ताकत और समाज की विशेषता हैं। ये हमारी एकता, सहयोग और परंपराओं का सच बयां करती हैं।
उन्होंने कहा कि यहां के लोग, विशेषकर बुजुर्ग, अपने घरों में खाना नहीं बनाते। सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन इसका कारण है गांव का कम्युनिटी किचन। इस किचन में पूरे गांव का खाना एक साथ बनाया जाता है और लोग मिलकर बैठकर खाते हैं। यह न केवल भोजन की जगह है, बल्कि लोगों को जोड़ने और समुदाय की भावना को मजबूत करने का एक तरीका है।
उन्होंने बताया कि यह परंपरा पिछले १५ वर्षों से चल रही है। यहां सभी का एक साथ खाना बनता है और फिर सभी मिलकर उसे खाते हैं। ऐसी पहलें हमारी संस्कृति और जीवनशैली का हिस्सा हैं, जो एकता, सहयोग और मानवता की भावना को बढ़ावा देती हैं।
इसके अलावा, अगर किसी गांव वाले को बीमार होने पर खाना चाहिए, तो उनके लिए टिफिन सेवा भी उपलब्ध है। यानी घरों में डिलीवरी का पूरा इंतजाम किया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह पहल न केवल लोगों को जोड़ती है, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक भावना को भी मजबूत करती है। यहां लोग सिर्फ भोजन ही नहीं बांटते, बल्कि अपनापन और एक-दूसरे की मदद भी साझा करते हैं।