क्या पीएम मोदी ने प्रख्यात तमिल विद्वान प्रोफेसर ज्ञानसुंदरम के निधन पर शोक व्यक्त किया?

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क्या पीएम मोदी ने प्रख्यात तमिल विद्वान प्रोफेसर ज्ञानसुंदरम के निधन पर शोक व्यक्त किया?

सारांश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रख्यात तमिल विद्वान प्रोफेसर ज्ञानसुंदरम के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने उनके योगदान को सराहा और कहा कि उनका ज्ञान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा। इस लेख में उनके जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है।

Key Takeaways

  • प्रोफेसर ज्ञानसुंदरम का योगदान तमिल साहित्य में अद्वितीय था।
  • उन्होंने 20 से अधिक पुस्तकों की रचना की।
  • पीएम मोदी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।
  • उन्हें इलक्किया मामानी पुरस्कार मिला था।
  • उनका जीवन और कार्य आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा।

चेन्नई, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रसिद्ध तमिल विद्वान और साहित्यकार टी. ज्ञानसुंदरम के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने उन्हें एक ऐसे महान व्यक्तित्व के रूप में याद किया, जिनका आजीवन समर्पण तमिल संस्कृति, साहित्य और विद्वत्ता को समृद्ध करता रहा।

अपने शोक संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रोफेसर ज्ञानसुंदरम के निधन से उन्हें गहरा दुख हुआ है और उन्होंने कहा कि तमिल साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपराओं में उनका योगदान पाठकों और विद्वानों की पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

जनवरी 2024 में तिरुचिरापल्ली स्थित श्री रंगनाथस्वामी मंदिर की यात्रा के दौरान हुई व्यक्तिगत मुलाकात को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कंब रामायण पर विद्वान की असाधारण पकड़ को रेखांकित किया और उस मुलाकात को यादगार और बौद्धिक रूप से ज्ञानवर्धक बताया।

उन्होंने शोक संतप्त परिवार और प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और श्रद्धांजलि का समापन 'ओम शांति' के साथ किया। प्रख्यात तमिल पंडित और केंद्रीय शास्त्रीय तमिल अध्ययन संस्थान के पूर्व उपाध्यक्ष, प्रोफेसर टी. ज्ञानसुंदरम (84), का 25 जनवरी को चेन्नई के एक निजी अस्पताल में वृद्धावस्था संबंधी बीमारी के कारण निधन हो गया।

उन्हें हाल ही में तमिलनाडु सरकार द्वारा तमिल साहित्य में उनके बहुआयामी योगदान के सम्मान में प्रतिष्ठित इलक्किया मामानी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

मयिलादुथुराई क्षेत्र के थिरासांदूर के पास कुઝैयूर गांव में जन्मे, प्रोफेसर ज्ञानसुंदरम ने कुंभकोणम के सरकारी महाविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की, मद्रास विश्वविद्यालय से संस्कृत में डिप्लोमा प्राप्त किया और वैष्णव साहित्य में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।

उन्होंने अपने शैक्षणिक जीवन की शुरुआत चेन्नई के पचैयप्पा कॉलेज से की, जहां उन्होंने कई वर्षों तक तमिल विभाग के प्रमुख और बाद में कार्यवाहक प्रधानाचार्य के रूप में कार्य किया।

सेवानिवृत्ति के बाद, वे पांडिचेरी केंद्रीय विश्वविद्यालय के पहले प्रोफेसर बने और दो वर्षों तक प्रतिष्ठित कंबन चेयर का पद संभाला।

उन्होंने केंद्रीय शास्त्रीय तमिल अध्ययन संस्थान के उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया और अनुसंधान एवं संस्थागत विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वैष्णव साहित्य के विद्वान, प्रोफेसर ज्ञानसुंदरम ने कुरंथोगई थस्ती और कर्पगा मलार सहित 20 से अधिक पुस्तकों की रचना की।

रामायण और कंब रामायणम पर उनके तुलनात्मक अध्ययन, साथ ही दिव्य प्रबन्धम और वैष्णव परंपराओं पर उनके शोध को व्यापक प्रशंसा मिली।

उन्होंने कंबन कजगम की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और प्रसिद्ध विद्वान प्रो. एम. वरदरासनर के शिष्य थे।

Point of View

यह स्पष्ट है कि प्रोफेसर ज्ञानसुंदरम का योगदान तमिल साहित्य और संस्कृति में अद्वितीय रहा है। उनका निधन न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे विद्या जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। हमें उनके कार्यों से प्रेरणा लेनी चाहिए और उनकी विरासत को आगे बढ़ाना चाहिए।
NationPress
04/02/2026

Frequently Asked Questions

प्रोफेसर ज्ञानसुंदरम का योगदान क्या था?
प्रोफेसर ज्ञानसुंदरम ने तमिल साहित्य और संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान दिया और 20 से अधिक पुस्तकों की रचना की।
क्या पीएम मोदी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया?
हाँ, पीएम मोदी ने प्रोफेसर ज्ञानसुंदरम के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।
प्रोफेसर ज्ञानसुंदरम को कौन सा पुरस्कार मिला था?
उन्हें हाल ही में तमिलनाडु सरकार द्वारा इलक्किया मामानी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
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