क्या पीएमएफबीवाई के तहत 78.41 करोड़ आवेदनों का बीमा हुआ है और 1.83 लाख करोड़ रुपए के दावों का भुगतान किया गया?

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क्या पीएमएफबीवाई के तहत 78.41 करोड़ आवेदनों का बीमा हुआ है और 1.83 लाख करोड़ रुपए के दावों का भुगतान किया गया?

सारांश

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) ने किसानों को 78.41 करोड़ आवेदनों का बीमा और 1.83 लाख करोड़ रुपए के दावों का भुगतान किया है। इस योजना के तहत वित्तीय सहायता और जोखिम प्रबंधन के उपाय किसानों के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध हुए हैं।

मुख्य बातें

पीएमएफबीवाई ने अब तक 78.41 करोड़ आवेदनों का बीमा किया।
1.83 लाख करोड़ रुपए के दावों का भुगतान किया गया।
किसानों का नामांकन 32 प्रतिशत बढ़ा।
किसानों को वित्तीय सहायता समय पर मिलती है।
यह योजना किसानों के लिए सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण साधन है।

नई दिल्ली, 12 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। हालिया सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, 2016 में आरंभ की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत अब तक 78.41 करोड़ आवेदनों का बीमा किया जा चुका है और 1.83 लाख करोड़ रुपए के दावों का भुगतान किया गया है।

किसानों का नामांकन 2022-23 के 3.17 करोड़ से 32 प्रतिशत बढ़कर 2024-25 में 4.19 करोड़ हो गया है, जो कि इस योजना की शुरुआत के बाद से सबसे अधिक है।

18 फरवरी, 2016 को शुरू की गई पीएमएफबीवाई का उद्देश्य किसानों को एक सरल, किफायती और व्यापक फसल बीमा समाधान प्रदान करना है।

यह योजना किसानों को सूखा, बाढ़, चक्रवात, ओलावृष्टि, कीटों के हमले और पौधों की बीमारियों जैसे अपरिहार्य प्राकृतिक जोखिमों से होने वाले फसल नुकसान से बचाती है।

पीएमएफबीवाई बुवाई से पहले से लेकर कटाई के बाद तक पूरे फसल चक्र को कवर करती है, जिसमें भंडारण के दौरान होने वाली क्षति भी शामिल है।

योजना किसी आपदा के कारण हुई क्षति की स्थिति में समय पर वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिससे किसानों को जोखिमों का प्रबंधन करने और कर्ज में डूबने से बचने में मदद मिलती है।

पूर्ववर्ती फसल बीमा योजनाओं की तुलना में, किसान आवेदनों का कवरेज 2014-15 में 371 लाख से बढ़कर 2024-25 में 1,510 लाख हो गया है।

इस योजना की सफलता और क्षमता को देखते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनवरी 2025 में 69,515.71 करोड़ रुपए के कुल बजट के साथ पीएमएफबीवाई और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना को 2025-26 तक जारी रखने की मंजूरी दी।

इसके अलावा, पीएमएफबीवाई अब किसान आवेदनों के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी फसल बीमा योजना है।

कई राज्यों ने प्रीमियम में किसानों का हिस्सा माफ कर दिया है, जिससे किसानों पर वित्तीय बोझ काफी कम हुआ है और योजना में व्यापक भागीदारी को बढ़ावा मिला है।

इस योजना के तहत, खरीफ खाद्यान्न और तिलहन फसलों के लिए किसान द्वारा देय अधिकतम प्रीमियम 2 प्रतिशत है।

रबी खाद्यान्न और तिलहन फसलों के लिए यह 1.5 प्रतिशत और वार्षिक वाणिज्यिक या बागवानी फसलों के लिए 5 प्रतिशत है।

इस बीच, बीते सोमवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राजस्थान के झुंझुनु से किसानों के खातों में पीएमएफबीवाई के तहत डिजिटल राशि का भुगतान किया। करीब 35 लाख किसानों के खातों में 3,900 करोड़ रुपए की धनराशि वितरित की गई।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि पीएमएफबीवाई किसानों की आर्थिक सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह योजना न केवल फसल बीमा का एक व्यापक ढांचा प्रदान करती है, बल्कि किसानों को प्राकृतिक आपदाओं के खिलाफ भी सुरक्षा प्रदान करती है। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू करे।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उद्देश्य क्या है?
इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से फसल के नुकसान से बचाना है।
किसानों को इस योजना से क्या लाभ है?
किसान इस योजना के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं, जो उन्हें प्राकृतिक आपदाओं के समय में मदद करती है।
इस योजना में प्रीमियम दरें क्या हैं?
खरीफ फसलों के लिए प्रीमियम 2 प्रतिशत, रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत, और वार्षिक वाणिज्यिक फसलों के लिए 5 प्रतिशत है।
पीएमएफबीवाई का क्या महत्व है?
यह योजना किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है और फसल के नुकसान को कम करने में मदद करती है।
इस योजना में नामांकन कैसे किया जाता है?
किसान अपने स्थानीय कृषि कार्यालय के माध्यम से इस योजना में नामांकन कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस