क्या प्रधानमंत्री मोदी ने सर मार्क टुली के निधन पर दुख व्यक्त किया?
सारांश
Key Takeaways
- सर मार्क टुली ने पत्रकारिता में अनमोल योगदान दिया।
- उनकी रिपोर्टिंग ने भारतीय समाज को समझने में मदद की।
- प्रधानमंत्री मोदी ने उनके कार्यों की सराहना की।
- वे अनेक पुरस्कारों के प्राप्तकर्ता थे।
- उनकी रचनाएँ आज भी प्रासंगिक हैं।
नई दिल्ली, 25 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रसिद्ध पत्रकार और लेखक सर विलियम मार्क टुली का निधन हो गया। उन्होंने रविवार को 90 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। उन्हें विश्वभर में मार्क टुली के नाम से जाना जाता था। उनके निधन पर प्रधानमंत्री मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि पत्रकारिता की दुनिया में एक महत्वपूर्ण शख्सियत सर मार्क टुली के निधन से उन्हें अत्यंत दुःख हुआ। भारत और हमारे लोगों के प्रति उनका लगाव उनके कार्यों में स्पष्ट था। उनकी रिपोर्टिंग और विचारों ने सार्वजनिक संवाद पर गहरी छाप छोड़ी है। उनके परिवार, मित्रों और सभी प्रशंसकों के प्रति संवेदनाएं।
मार्क टुली बीबीसी के पूर्व पत्रकार रहे हैं, जिन्होंने अपने पूरे करियर में भारत और दक्षिण एशिया की रिपोर्टिंग की। उन्हें भारत और ब्रिटेन दोनों सरकारों की ओर से अनेक सम्मानों से नवाजा गया। वे लंबे समय से बीमार थे और दक्षिण दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती थे, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
मार्क टुली का जन्म 24 अक्टूबर 1935 को कोलकाता के टॉलीगंज में एक संपन्न ब्रिटिश व्यवसायी परिवार में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भारत में प्राप्त की, जिसमें दार्जिलिंग के एक बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई शामिल थी। नौ वर्ष की उम्र में वे ब्रिटेन चले गए। उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से धर्मशास्त्र की पढ़ाई की और आरंभ में चर्च से जुड़ने की योजना बनाई, लेकिन बाद में उन्होंने पत्रकारिता को अपने करियर के रूप में चुना और 1964 में बीबीसी में शामिल हुए।
1965 में वे बीबीसी के भारत संवाददाता के रूप में लौटे और बाद में नई दिल्ली ब्यूरो के प्रमुख बने। अपने 22 साल के कार्यकाल में, उन्होंने दक्षिण एशिया की प्रमुख घटनाओं की रिपोर्टिंग की, जिसमें भारत-पाकिस्तान युद्ध, ऑपरेशन ब्लू स्टार, इंदिरा गांधी की हत्या, सिख विरोधी दंगे, भोपाल गैस त्रासदी, राजीव गांधी की हत्या और बाबरी मस्जिद का विध्वंस जैसी घटनाएं शामिल हैं।
जुलाई 1994 में बीबीसी के तत्कालीन महानिदेशक से विवाद के बाद उन्होंने बीबीसी छोड़ दिया और स्वतंत्र पत्रकार तथा प्रसारक के रूप में काम जारी रखा। लेकिन उनका बीबीसी से जुड़ाव बना रहा और वे 2019 तक कुछ कार्यक्रमों में दिखाई देते रहे।
मार्क टुली एक प्रसिद्ध लेखक भी थे। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘अमृतसर: मिसेज गांधी की आखिरी लड़ाई’ (1985), ‘राज से राजीव: भारतीय स्वतंत्रता के 40 वर्ष’ (1988), ‘नो फुल स्टॉप्स इन इंडिया’ (1988), ‘इंडिया इन स्लो मोशन’ (2002), ‘इंडियाज अनएंडिंग जर्नी’ (2008) और ‘इंडिया: द रोड अहेड’ (2011) शामिल हैं।
उनकी चर्चित काल्पनिक रचनाओं में ‘द हार्ट ऑफ इंडिया’ (1995) और ‘अपकंट्री टेल्स’ (2017) शामिल हैं।
मार्क टुली को 1985 में ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर का खिताब मिला था। भारत सरकार ने उन्हें 1992 में पद्म श्री और 2005 में पद्म भूषण से सम्मानित किया।