क्या बिहार चुनाव में राजनगर सीट, 'राम' नाम की सियासी परंपरा और मिथिला की सांस्कृतिक विरासत का केंद्र बनेगी?

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क्या बिहार चुनाव में राजनगर सीट, 'राम' नाम की सियासी परंपरा और मिथिला की सांस्कृतिक विरासत का केंद्र बनेगी?

सारांश

बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच, मधुबनी जिले की राजनगर सीट सुर्खियों में है। यह सीट न केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व रखती है, बल्कि 'राम' नाम की राजनीतिक परंपरा के लिए भी प्रसिद्ध है। क्या यह परंपरा अगले चुनाव में भी कायम रहेगी? जानिए इस सीट की रोचकता के बारे में।

मुख्य बातें

राजनगर विधानसभा सीट का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है।
यह सीट 1967 में स्थापित हुई थी।
यहां के अधिकांश विधायकों के नाम में 'राम' शामिल है।
इस सीट की अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।
राजनगर पैलेस और मां काली मंदिर की सांस्कृतिक पहचान है।

पटना, 13 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में इस वर्ष विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में मधुबनी जिले की राजनगर विधानसभा सीट पर सभी की निगाहें केंद्रित हैं। यह सीट न केवल अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसकी राजनीतिक परंपरा भी बहुत विशेष रही है। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित यह सीट झंझारपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है।

विधानसभा चुनाव के संदर्भ में राजनगर एक दिलचस्प सीट रही है। इसकी स्थापना 1967 में हुई थी और 1977 में इसे भंग कर दिया गया था। 2008 में परिसीमन के बाद यह सीट पुनः अस्तित्व में आई और तब से अब तक चार विधानसभा चुनाव (एक उपचुनाव सहित) हो चुके हैं।

यहां पर 1967 से 1972 तक कांग्रेस का दबदबा रहा, जबकि 2010 और 2014 में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने जीत हासिल की। इसके बाद 2015 और 2020 में भाजपा ने इस सीट पर नियंत्रण पाया।

इस सीट की सबसे रोचक बात यह है कि यहां से जीतने वाले अधिकांश विधायकों के नाम में 'राम' अवश्य शामिल रहा है। चाहे वह कांग्रेस के राम कृष्ण महतो हों, राजद के राम लखन पासवान और राम अवतार पासवान या भाजपा के राम प्रीत पासवान। एकमात्र अपवाद रहे हैं बिलट पासवान विहंगम, जिन्होंने 1969 और 1972 में जीत हासिल की थी। ऐसे में 2025 के चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि 'राम' नाम का यह सिलसिला जारी रहता है या कोई नया चेहरा इस परंपरा को तोड़ता है।

जनसांख्यिकी के अनुसार, चुनाव आयोग के अनुसार, 2024 में इस क्षेत्र की अनुमानित कुल आबादी 5,77,019 है, जिसमें पुरुषों की संख्या 3,00,154 और महिलाओं की 2,76,865 है। कुल पंजीकृत मतदाता 3,39,401 हैं, जिनमें 1,77,479 पुरुष और 1,61,896 महिलाएं शामिल हैं।

इस सीट की सांस्कृतिक और भावनात्मक पहचान राजनगर पैलेस और मां काली मंदिर से भी जुड़ी हुई है। राजनगर पैलेस, बिहार के गौरवशाली अतीत और मिथिला की सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक है। मधुबनी जिले के राजनगर में यह पैलेस 1,500 एकड़ में फैला हुआ है। इस ऐतिहासिक महल का निर्माण महाराज महेश्वर सिंह ने कराया था।

1934 के विनाशकारी भूकंप में यह काफी क्षतिग्रस्त हो गया, लेकिन आज भी इसका संग्रहालय, नक्काशीदार पत्थर, लकड़ी की कलाकृतियां और विशाल हाथी प्रतिमाएं मिथिला की समृद्ध विरासत की गवाही देते हैं।

महल परिसर में स्थित सफेद संगमरमर से बने मां काली मंदिर नवरात्रि में भक्तों से भरा रहता है। यह मां काली मंदिर, मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बिहार के मधुबनी जिले में स्थित है, अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर के लिए जानी जाती है। यहाँ की राजनीतिक परंपरा, विशेष रूप से 'राम' नाम के साथ, इसे और भी विशेष बनाती है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह परंपरा आगामी चुनावों में भी कायम रहेगी या नहीं।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजनगर विधानसभा सीट का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
राजनगर सीट का ऐतिहासिक महत्व इसकी सांस्कृतिक धरोहर और राजनीतिक परंपरा में निहित है। यह सीट 1967 में स्थापित की गई थी और इसके राजनीतिक इतिहास में कई प्रमुख दलों की जीत शामिल है।
राजनगर सीट पर किसका दबदबा रहा है?
यहां पर 1967 से 1972 तक कांग्रेस का दबदबा रहा। इसके बाद राजद और भाजपा ने भी इस सीट पर जीत हासिल की।
इस सीट की जनसंख्या क्या है?
2024 में इस क्षेत्र की अनुमानित कुल आबादी 5,77,019 है, जिसमें पुरुषों की संख्या 3,00,154 और महिलाओं की 2,76,865 है।
राजनगर पैलेस का क्या महत्व है?
राजनगर पैलेस बिहार के गौरवशाली अतीत और मिथिला की सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक है। इसका निर्माण महाराज महेश्वर सिंह ने कराया था।
क्या 'राम' नाम का सिलसिला अगले चुनाव में भी जारी रहेगा?
यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आगामी चुनावों में 'राम' नाम की परंपरा जारी रहती है या कोई नया चेहरा इसे तोड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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