राज्य स्थापना दिवस: क्या हिमंत बिस्वा सरमा और आशीष सूद ने त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर को शुभकामनाएं दीं?

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राज्य स्थापना दिवस: क्या हिमंत बिस्वा सरमा और आशीष सूद ने त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर को शुभकामनाएं दीं?

सारांश

राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर को बधाई देने के लिए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने महत्वपूर्ण संदेश साझा किए। जानिए इन राज्यों के इतिहास और उनके विकास के सफर के बारे में।

मुख्य बातें

त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर का राज्य गठन 1972 में हुआ।
हिमंत बिस्वा सरमा ने शुभकामनाएं दीं।
इन राज्यों की सांस्कृतिक विविधता महत्वपूर्ण है।
पूर्वोत्तर के विकास में इन राज्यों की भूमिका अनमोल है।
यह दिन उनकी पहचान और आत्मसम्मान का प्रतीक है।

नई दिल्ली, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पूर्वोत्तर भारत के तीन महत्वपूर्ण राज्यों (त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर) को 1972 में भारतीय संघ में पूर्ण राज्य का दर्जा मिला, जिसने पूर्वोत्तर क्षेत्र के राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचे में एक नया अध्याय जोड़ा।

इस विशेष अवसर पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर की जनता को शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर राज्यों को उनके राज्य स्थापना दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं। अपनी समृद्ध परंपराओं और मेहनती लोगों के साथ, ये सभी राज्य पूर्वोत्तर की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे सद्भाव के साथ प्रगति करें, और उनकी अनूठी सांस्कृतिक पहचान हमेशा फलती-फूलती रहे।"

दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने भी मेघालय, त्रिपुरा और मणिपुर के लोगों को स्थापना दिवस की बधाई दी।

उन्होंने 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए लिखा, "ये राज्य अपनी समृद्ध विरासत, सांस्कृतिक विविधता और लोगों की आकांक्षाओं के साथ लगातार प्रगति करते रहें।"

बता दें कि त्रिपुरा, मणिपुर, और मेघालय के राज्य बनने का सफर 1970 के दशक की शुरुआत में पूर्वोत्तर भारत के पुनर्गठन से जुड़ा है। आजादी के समय इस क्षेत्र में असम के मैदानी इलाके, पहाड़ी जिले, और मणिपुर व त्रिपुरा जैसी रियासतें शामिल थीं।

मणिपुर और त्रिपुरा ने 1949 में भारत में विलय किया था। इसके बाद 1956 में इन्हें केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला, लेकिन दोनों राज्यों की लंबे समय से पूर्ण राज्य बनने की इच्छा थी, जो आखिरकार 21 जनवरी 1972 को पूरी हुई।

मेघालय पहले असम का हिस्सा था। असम पुनर्गठन (मेघालय) अधिनियम, 1969 के जरिए इसे स्वायत्तता मिली और फिर 1972 में इसे पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया।

इस पूरे परिवर्तन की संवैधानिक नींव संसद द्वारा पारित नॉर्थ ईस्टर्न एरियाज रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट, 1971 ने रखी, जिसका उद्देश्य क्षेत्र की विशिष्ट सांस्कृतिक, सामाजिक और प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करना था। आज, यह दिन पूर्वोत्तर के इन तीनों राज्यों की पहचान, आत्मसम्मान और विकास की यात्रा का प्रतीक बन चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मेघालय और मणिपुर के लोगों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है। यह इन राज्यों की पहचान और आत्मा को दर्शाता है। भारतीय संघ में इनकी भूमिका और योगदान को समझना आवश्यक है, और हमें इसे समर्पित होकर मनाना चाहिए।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर कब पूर्ण राज्य बने?
ये राज्य 21 जनवरी 1972 को भारतीय संघ में पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुए।
हिमंत बिस्वा सरमा ने क्या कहा?
उन्होंने इन राज्यों को उनके स्थापना दिवस पर शुभकामनाएं दीं और उनकी सांस्कृतिक पहचान की सराहना की।
क्या मेघालय पहले असम का हिस्सा था?
हाँ, मेघालय पहले असम का हिस्सा था और 1972 में इसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।
राष्ट्र प्रेस
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