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क्या तमिलनाडु चुनाव से पहले गठबंधन की खींचतान में फंसे हैं पीएमके संस्थापक रामदास, डीएमके का दबाव बढ़ रहा है?

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क्या तमिलनाडु चुनाव से पहले गठबंधन की खींचतान में फंसे हैं पीएमके संस्थापक रामदास, डीएमके का दबाव बढ़ रहा है?

सारांश

तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के नजदीक, पीएमके के संस्थापक एस. रामदास को डीएमके का दबाव झेलना पड़ रहा है। उनके राजनीतिक भविष्य और पार्टी के गुटीय समीकरणों में अस्थिरता के बीच, क्या वे आगामी चुनावों में अपनी पहचान बनाए रख पाएंगे?

मुख्य बातें

पीएमके के संस्थापक एस.
रामदास की राजनीतिक स्थिति जटिल है।
डीएमके का दबाव बढ़ने से गठबंधन की संभावनाएँ हैं।
रामदास के गुट का भविष्य गुटीय समीकरणों पर निर्भर करेगा।

चेन्नई, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पूर्व पट्टाली मक्कल कच्ची (पीएमके) के संस्थापक एस. रामदास एक जटिल राजनीतिक स्थिति में फंसते हुए प्रतीत हो रहे हैं। पार्टी के भीतर बदलते गुटीय समीकरणों ने उनके रणनीतिक विकल्पों को सीमित कर दिया है।

इस अनिश्चितता की तात्कालिक वजह उनके बेटे अंबुमणि रामदास के नेतृत्व वाले गुट का एआईएडीएमके-नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होना है।

पार्टी का एक धड़ा पहले से ही विपक्षी गठबंधन के साथ मजबूती से जुड़ चुका है, जिससे सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) की ओर से एस रामदास पर अपने गुट को डीएमके के गठबंधन में लाने का दबाव बढ़ता जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, डीएमके ने एस रामदास के नेतृत्व वाले गुट के साथ गठबंधन स्तर की बातचीत प्रारंभ कर दी है और पार्टी यह भी चाहती है कि पीएमके के उम्मीदवार आगामी विधानसभा चुनाव डीएमके के “उगता सूरज” चुनाव चिन्ह पर लड़ें।

हालांकि, यह कदम पीएमके संस्थापक के लिए राजनीतिक रूप से काफी कठिन माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी वर्षों से अपनी स्वतंत्र पहचान और चुनाव चिन्ह बनाए रखने पर जोर देती रही है।

रामदास के नेतृत्व वाले गुट के राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तब और तेज हो गईं, जब हाल ही में थाइलापुरम स्थित उनके आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने डीएमके सरकार के कार्यों की खुलकर सराहना की।

यह कार्यक्रम आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पीएमके टिकट के इच्छुक उम्मीदवारों को आवेदन पत्र वितरित करने से संबंधित था, लेकिन इसमें रामदास का सत्तारूढ़ डीएमके के प्रति अपेक्षाकृत नरम और सकारात्मक रुख चर्चा का विषय रहा।

अटकलों को और हवा तब मिली, जब पीएमके संस्थापक से डीएमके-नेतृत्व वाले मोर्चे, जिसमें विदुथलाई चिरुथैगल कच्ची (वीसीके) के नेता थोल थिरुमावलवन भी शामिल हैं, के साथ संभावित गठबंधन को लेकर सवाल किया गया।

इस पर सतर्क प्रतिक्रिया देते हुए रामदास ने कहा कि “चुनाव में कुछ भी हो सकता है”, जिसे व्यापक रूप से बातचीत के लिए दरवाजा खुला रखने के संकेत के रूप में देखा गया।

इसके बाद ऐसी खबरें भी सामने आईं कि डीएमके और रामदास गुट के बीच औपचारिक गठबंधन के लिए वार्ता चल रही है।

सूत्रों का कहना है कि समझौता होने की स्थिति में डीएमके-पीएमके गुट को लगभग पांच विधानसभा सीटें देने पर विचार कर रही है। संभावित उम्मीदवारों में वरिष्ठ पीएमके नेता जी.के. मणि, पार्टी पदाधिकारी अरुल और रामदास की बेटी श्रीकांति के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

राजनीतिक गुटों के बीच की खींचतान और पार्टी के भीतर की अस्थिरता दर्शाती है कि चुनावी राजनीति में गठबंधन की मजबूरियाँ और व्यक्तिगत आकांक्षाएँ कैसे परस्पर टकरा सकती हैं। यह मुद्दा केवल तमिलनाडु के लिए नहीं, बल्कि सम्पूर्ण देश की राजनीति में महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामदास का राजनीतिक भविष्य क्या है?
रामदास का राजनीतिक भविष्य गुटीय समीकरणों और डीएमके के साथ संभावित गठबंधन पर निर्भर करता है।
डीएमके का दबाव क्यों बढ़ रहा है?
डीएमके का दबाव इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि पीएमके का एक धड़ा पहले से ही विपक्षी गठबंधन में शामिल हो चुका है।
क्या पीएमके का डीएमके के साथ गठबंधन होगा?
संभावना है कि पीएमके और डीएमके के बीच औपचारिक गठबंधन के लिए वार्ता चल रही है।
राष्ट्र प्रेस
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