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क्या आरबीआई दिसंबर की मौद्रिक नीति में रेपो रेट को 5.5 प्रतिशत पर बनाए रखेगा?

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क्या आरबीआई दिसंबर की मौद्रिक नीति में रेपो रेट को 5.5 प्रतिशत पर बनाए रखेगा?

सारांश

क्या आरबीआई अपने दिसंबर की मौद्रिक नीति में रेपो रेट को 5.5 प्रतिशत पर बनाए रखेगा? जानिए एसबीआई रिसर्च के अनुसार, अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर में हालिया उछाल ने किस प्रकार से मौद्रिक नीति को प्रभावित किया है।

मुख्य बातें

आरबीआई दिसंबर में रेपो रेट को 5.5 प्रतिशत पर रख सकता है।
अर्थव्यवस्था की विकास दर 8.2 प्रतिशत रही है।
एसबीआई रिसर्च ने हाल के आंकड़ों का विश्लेषण किया है।
वैश्विक ब्याज दर स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
केंद्रीय बैंक को नीतिगत क्षेत्र में सकारात्मक कदम उठाने होंगे।

नई दिल्ली, 30 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। वित्त वर्ष 26 के जुलाई-सितंबर में अर्थव्यवस्था की विकास दर 8.2 प्रतिशत तक पहुँच गई है, जिससे आरबीआई अपनी दिसंबर की मौद्रिक नीति में रेपो रेट को 5.5 प्रतिशत पर बनाए रख सकता है। यह जानकारी एसबीआई रिसर्च द्वारा रविवार को साझा की गई।

एसबीआई रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि हाल ही में दिसंबर की मौद्रिक नीति में 0.25 प्रतिशत की कटौती की संभावना व्यक्त की गई थी, लेकिन सितंबर तिमाही में जीडीपी के मजबूत आंकड़ों के कारण अब यह संभावना कम हो गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, विश्वभर के केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरों में स्थिरता बनाए रखने का प्रयास किया है। हालांकि, ब्याज दरों में कटौती के निर्णय अब पहले की तुलना में काफी कम हो गए हैं।

वैश्विक स्तर पर इक्विटी बाजार तर्कहीन प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि निफ्टी 500 बेहतर स्थिति में दिखाई दे रहा है।

दिसंबर के पहले सप्ताह में होने वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक से पहले जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय बैंक को नीतिगत क्षेत्र के बाहर सकारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है। बाजार की धारणा को बदलना भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी बॉंड बाजार तेजी से अव्यवस्थित हो रहा है। ओवरनाइट रेपो दर और 10-वर्षीय सरकारी बॉंड यील्ड के बीच का अंतर 40-50 बीपीएस से बढ़कर 100-110 बीपीएस हो गया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बिना किसी दर कटौती के व्यापक विकास के लिए एक "न्यूट्रल रीजम" आवश्यक है, जो यील्ड और तरलता प्रबंधन को संतुलित रखेगा।

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 3-5 दिसंबर को होगी।

भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल की है, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 5.6 प्रतिशत से काफी अधिक है।

सरकार की ओर से जारी एक बयान में उल्लेख किया गया कि वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर के आठ प्रतिशत से ऊपर जाने का कारण द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र का मजबूत प्रदर्शन है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि मौद्रिक नीति का प्रभावी प्रबंधन अर्थव्यवस्था के विकास के लिए आवश्यक है। आरबीआई का निर्णय न केवल वित्तीय स्थिरता को सुनिश्चित करेगा, बल्कि यह सरकार की विकास योजनाओं के कार्यान्वयन में भी सहायता करेगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरबीआई रेपो रेट क्यों नहीं कम कर रहा?
अर्थव्यवस्था की विकास दर में वृद्धि और वैश्विक स्थिरता के कारण आरबीआई रेपो रेट को बनाए रखने का निर्णय ले सकता है।
क्या उच्च रेपो रेट का अर्थ है महंगी कर्ज?
हाँ, उच्च रेपो रेट का मतलब है कि बैंकों को अधिक कर्ज पर ब्याज देना पड़ता है, जिससे उपभोक्ताओं को भी महंगे कर्ज मिलते हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिति क्या है?
भारत की अर्थव्यवस्था वर्तमान में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर पर है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी बेहतर है।
क्यों जरूरी है मौद्रिक नीति का प्रबंधन?
मौद्रिक नीति का प्रबंधन आर्थिक स्थिरता और विकास के लिए आवश्यक है, जिससे बाजार की धारणा में सुधार होता है।
क्या केंद्रीय बैंक की नीतियों का असर शेयर बाजार पर होता है?
बिल्कुल, केंद्रीय बैंक की नीतियों का सीधा प्रभाव शेयर बाजार और निवेशकों की धारणा पर पड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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