क्या आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने रांची में जनजातियों से संवाद किया?
सारांश
Key Takeaways
- संघ प्रमुख का संवाद कार्यक्रम जनजातीय समुदाय के साथ संबंध बनाने का प्रयास है।
- कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति और समाज की चिंताओं पर चर्चा की गई।
- आरएसएस लंबे समय से आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएं प्रदान कर रहा है।
रांची, 24 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत झारखंड की राजधानी रांची में जनजातीय समुदाय के साथ सीधा संवाद स्थापित करने आए हैं। वे शुक्रवार को रांची पहुंचे और शनिवार को आयोजित 'जनजातीय संवाद' कार्यक्रम में भाग लिया।
यह कार्यक्रम रांची के कार्निवल बैंक्वेट हॉल में प्रारंभ हुआ, जिसमें झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 400 से 1000 आदिवासी प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। यह एक विशेष बैठक है, जहां संघ प्रमुख मोहन भागवत आदिवासी प्रतिनिधियों के साथ संवाद कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में जनजातीय समाज की चिंताओं, सांस्कृतिक धरोहर, विकास, सामाजिक एकता और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हो रहा है।
इस बैठक में आरएसएस के क्षेत्र प्रचारक रामनवमी प्रसाद जी, प्रांत प्रचारक गोपाल जी सहित संघ के कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। बैठक का समय दोपहर तक या शाम 3:30 बजे तक रहने की संभावना है, जिसमें प्रतिनिधि अपनी बात रख सकेंगे और संघ प्रमुख उनके सुझाव सुनेंगे।
आरएसएस का यह प्रयास जनजातीय समुदाय के साथ मजबूत संबंध स्थापित करना, उनकी भावनाओं को समझना और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना है। झारखंड जैसे राज्य में जहां आदिवासी जनसंख्या अधिक है, ऐसे संवाद कार्यक्रमों का विशेष महत्व है। संघ लंबे समय से आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक संरक्षण के कार्य कर रहा है।
जानकारी के अनुसार, कार्यक्रम के समापन के बाद मोहन भागवत शनिवार शाम को रेल मार्ग से पटना के लिए प्रस्थान करेंगे। पटना में वे वहां के संगठनात्मक कार्यक्रमों में भाग लेंगे। यह दौरा आरएसएस की उस नीति का हिस्सा है, जिसमें समाज के हर वर्ग के साथ जुड़कर राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत किया जाता है। मोहन भागवत के इस संवाद से जनजातीय समुदाय में संघ की गतिविधियों के प्रति नई जागरूकता और विश्वास बढ़ने की उम्मीद है।