संगमेश्वर में कबाड़ गोदाम में भीषण आग, ₹2 लाख से अधिक का नुकसान; दमकल ने 6 घंटे में पाया काबू
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के संगमेश्वर में सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 की देर रात एक कबाड़ के गोदाम में भीषण आग लग गई, जिसमें गोदाम में जमा बड़ी मात्रा में कबाड़ जलकर खाक हो गया। शुरुआती अनुमान के अनुसार इस घटना में ₹2 लाख से अधिक का नुकसान हुआ है, हालाँकि आधिकारिक आकलन जाँच के बाद होगा। दमकल विभाग की तत्परता से आग को आसपास की इमारतों तक फैलने से रोक लिया गया और एक बड़ा हादसा टल गया।
घटनाक्रम: कैसे लगी आग
मारुति मंदिर के सामने स्थित अमित पासवान के कबाड़ के गोदाम में रात करीब 2 बजे अचानक आग लग गई। गोदाम में ज्वलनशील सामग्री और कबाड़ की अत्यधिक मात्रा होने के कारण आग ने देखते-देखते विकराल रूप ले लिया। आग की ऊँची लपटें उठती देख इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय निवासियों ने तत्काल दमकल विभाग को सूचित किया।
आग बुझाने का अभियान रात 12:48 बजे आधिकारिक रूप से शुरू हुआ। आग की तीव्रता और आसपास के मकानों व दुकानों को खतरे को देखते हुए एकाधिक दमकल दल तुरंत मौके पर भेजे गए।
बचाव अभियान: चार दमकल टीमों ने संभाला मोर्चा
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए देवरुख की दमकल टीम सबसे पहले घटनास्थल पर पहुँची। इसके बाद चिपलून नगर परिषद, रत्नागिरी एमआईडीसी और रत्नागिरी नगर परिषद की दमकल गाड़ियों को भी बुलाया गया। गोदाम में ज्वलनशील कबाड़ की अधिकता के चलते दमकलकर्मियों को आग बुझाने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।
अभियान में क्रू लीडर लिंगप्पा हलमानी के नेतृत्व में सागर तलेकर, आकाश करंडे और अन्य दमकलकर्मियों ने पूरी रात लगातार प्रयास किए। उनकी सतर्कता और समन्वय के चलते आग को पड़ोसी घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक फैलने से सफलतापूर्वक रोका जा सका।
लगातार करीब 6 घंटे के प्रयासों के बाद सुबह करीब 7 बजे आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया।
नुकसान का आकलन
शुरुआती जानकारी के अनुसार गोदाम में रखा कबाड़ बड़े पैमाने पर जल गया है और नुकसान ₹2 लाख से अधिक होने का अनुमान है। हालाँकि, घटना में हुए नुकसान का आधिकारिक और अंतिम आकलन अभी किया जाना बाकी है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार जाँच पूरी होने के बाद ही सटीक आँकड़ा सामने आ सकेगा।
आग लगने के कारण अज्ञात, जाँच जारी
फिलहाल आग लगने के सही कारणों का पता नहीं चल पाया है। अधिकारियों के अनुसार घटना के कारणों की पुष्टि जाँच के बाद ही हो सकेगी। गौरतलब है कि कबाड़ गोदामों में ज्वलनशील सामग्री की मौजूदगी आग लगने का जोखिम बढ़ा देती है, और इस तरह की घटनाएँ महाराष्ट्र के ग्रामीण व अर्ध-शहरी इलाकों में समय-समय पर सामने आती रहती हैं।
स्थानीय निवासियों के लिए राहत की बात यह रही कि दमकल दलों की तीव्र प्रतिक्रिया ने नुकसान को सीमित रखा। यदि आग आसपास की इमारतों तक फैल जाती, तो जान-माल का नुकसान कहीं अधिक हो सकता था। प्रशासन से माँग की जा रही है कि ऐसे गोदामों में अग्नि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।